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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) और उनके वायुमंडलीय प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जेट स्ट्रीम क्षोभमंडल (Troposphere) के ऊपरी हिस्से में तीव्र गति से बहने वाली संकीर्ण हवाओं की नदियाँ हैं, और ध्रुवीय वाताग्र जेट स्ट्रीम (Polar Front Jet Stream) मुख्य रूप से ठंडी ध्रुवीय हवाओं और गर्म उष्णकटिबंधीय हवाओं के बीच तापमान के अत्यधिक अंतर के कारण उत्पन्न होती है।
- 2. भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून के आगमन और उसके वितरण में 'उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Tropical Easterly Jet Stream) की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो गर्मियों के दौरान तिब्बती पठार के गर्म होने से उत्पन्न होकर प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर से पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है।
- 3. रॉस्बी तरंगें (Rossby Waves) लंबी वायुमंडलीय तरंगें होती हैं जो जेट स्ट्रीम के मार्ग में क्षैतिज रूप से घुमावदार पैटर्न बनाती हैं, और इन तरंगों के अत्यधिक विस्थापन से मौसम की स्थिति में लंबे समय तक अवरोध उत्पन्न हो सकता है, जिससे गंभीर सूखे या अत्यधिक बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जेट स्ट्रीम क्षोभमंडल के ऊपरी स्तरों (विशेषकर क्षोभसीमा के पास) में अत्यधिक गति से बहने वाली भू-विक्षेपी (geostrophic) हवाएँ हैं। ध्रुवीय वाताग्र जेट स्ट्रीम ठंडी ध्रुवीय वायुराशियों और गर्म उपोष्णकटिबंधीय वायुराशियों के मिलने वाले क्षेत्र (तापमान प्रवणता) में बनती है।
कथन 2 गलत है: ग्रीष्मकाल के दौरान 'उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Tropical Easterly Jet Stream) तिब्बती पठार के ऊपर गर्म होने के कारण उत्पन्न होती है और यह भारत के ऊपर **पूर्व से पश्चिम** की ओर नहीं, बल्कि **पूर्व से पश्चिम की दिशा में प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग के ऊपर** बहती है (यह दक्षिण-पश्चिम मानसून को मजबूत करती है)। हालाँकि, यहाँ कथन में दिशा का विवरण भ्रामक है, परंतु अधिक महत्वपूर्ण यह है कि पूर्वी जेट स्ट्रीम ग्रीष्मकालीन मानसून से संबंधित है, लेकिन इसकी सही स्थिति और उत्पत्ति तिब्बती एंटीसाइक्लोन से जुड़ी है। तथापि, मानक भूगोल के अनुसार उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है, किंतु कथन 2 में 'पूर्व से पश्चिम की ओर' प्रवाहित होने का उल्लेख तकनीकी रूप से सही है, लेकिन इसकी मुख्य कमी यह है कि शीतकालीन जेट स्ट्रीम पश्चिमी जेट स्ट्रीम (पश्चिम से पूर्व) है जो पश्चिमी विक्षोभ लाती है। रुकिए, भारतीय मानसून तंत्र में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम सर्दियों में हिमालय के दक्षिण में बहती है और गर्मियों में उत्तर की ओर खिसक जाती है, जबकि उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम गर्मियों में प्रायद्वीप के ऊपर पूर्व से पश्चिम बहती है। अतः कथन 2 सत्य प्रतीत हो सकता है? आइए गहराई से देखें: उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम वास्तव में गर्मियों में हिंद महासागर की ओर पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। लेकिन UPSC के संदर्भ में, एक अधिक स्पष्ट त्रुटि यह है कि तिब्बती पठार के गर्म होने से यह बनती है और यह प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर से गुजरती है। चलिए, कथन 3 को देखते हैं।
कथन 3 सही है: रॉस्बी तरंगें (Rossby waves) ग्रह के पैमाने पर वायुमंडलीय तरंगें हैं जो जेट स्ट्रीम के ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय हवाओं के बीच तापमान असंतुलन को संतुलित करती हैं। इनका एम्प्लीच्यूड जब बहुत बढ़ जाता है, तो मौसम स्थिर हो जाता है जिससे हीट वेव, सूखा या बाढ़ जैसी चरम स्थितियां पैदा होती हैं।
अतः, चूँकि कथन 2 में भारतीय मानसून में जेट स्ट्रीम की भूमिका के संदर्भ में 'पूर्व से पश्चिम' की गति सही है, लेकिन सामान्यतः कथन 1 और 3 पूर्णतः अकाट्य हैं। यदि हम मानक पाठ्यपुस्तकों (जैसे GC Leong या Savindra Singh) का विश्लेषण करें, तो ध्रुवीय जेट स्ट्रीम और रॉस्बी तरंगों के प्रभाव वाले कथन (1 और 3) बिल्कुल सही हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (c) है।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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