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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) का एक हिस्सा है।
  2. 2. 'लोकूश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा ऐतिहासिक 'ए. के. गोपालन मामले' से लेकर 'मेनका गांधी मामले (1978)' तक के न्यायिक विकास के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत रिट अधिकारिता केवल 'प्रक्रियात्मक कानून' (Procedural Law) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के व्यापक संरक्षण का साधन है।
  3. 3. भारत में जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को स्थापित करने का श्रेय न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर को जाता है, जिसके अंतर्गत 'लॉस स्टैंडी' (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल किया गया, जिससे यह संभव हुआ कि प्रभावित व्यक्ति के अलावा कोई भी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था समाज के शोषित और पीड़ित वर्गों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए पांच प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा) जारी करने की शक्ति प्राप्त है। यह सर्वोच्च न्यायालय का मूल (Original) किंतु अनन्य (Exclusive) अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी यह शक्ति प्राप्त है। कथन 2 गलत है: ए. के. गोपालन मामला (1950) निवारक नजरबंदी से संबंधित था जिसमें न्यायालय ने संकुचित दृष्टिकोण अपनाया था, जबकि 'मेनका गांधी मामले (1978)' ने अनुच्छेद 21 और 32 के दायरे का अभूतपूर्व विस्तार किया। हालांकि, प्रश्न में उल्लिखित 'लोकूश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' इस संदर्भ का स्थापित विधिक आधार नहीं है। इसके अलावा, अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है (डॉ. अंबेडकर के अनुसार संविधान की आत्मा और हृदय), न कि केवल 'प्रक्रियात्मक कानून'। कथन 3 सही है: भारत में जनहित याचिका (PIL) की शुरुआत 1980 के दशक की शुरुआत में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर के प्रयासों से हुई। इसके तहत 'लॉस स्टैंडी' (यानी मुकदमा दायर करने का अधिकार केवल पीड़ित व्यक्ति को है) के कठोर नियम को शिथिल किया गया, ताकि समाज के कमजोर, वंचित और गरीबों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
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