त्वरित लिंक्स
Civil services
15 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) का एक हिस्सा है।
- 2. 'लोकूश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा ऐतिहासिक 'ए. के. गोपालन मामले' से लेकर 'मेनका गांधी मामले (1978)' तक के न्यायिक विकास के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत रिट अधिकारिता केवल 'प्रक्रियात्मक कानून' (Procedural Law) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के व्यापक संरक्षण का साधन है।
- 3. भारत में जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को स्थापित करने का श्रेय न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर को जाता है, जिसके अंतर्गत 'लॉस स्टैंडी' (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल किया गया, जिससे यह संभव हुआ कि प्रभावित व्यक्ति के अलावा कोई भी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था समाज के शोषित और पीड़ित वर्गों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए पांच प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा) जारी करने की शक्ति प्राप्त है। यह सर्वोच्च न्यायालय का मूल (Original) किंतु अनन्य (Exclusive) अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी यह शक्ति प्राप्त है।
कथन 2 गलत है: ए. के. गोपालन मामला (1950) निवारक नजरबंदी से संबंधित था जिसमें न्यायालय ने संकुचित दृष्टिकोण अपनाया था, जबकि 'मेनका गांधी मामले (1978)' ने अनुच्छेद 21 और 32 के दायरे का अभूतपूर्व विस्तार किया। हालांकि, प्रश्न में उल्लिखित 'लोकूश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' इस संदर्भ का स्थापित विधिक आधार नहीं है। इसके अलावा, अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है (डॉ. अंबेडकर के अनुसार संविधान की आत्मा और हृदय), न कि केवल 'प्रक्रियात्मक कानून'।
कथन 3 सही है: भारत में जनहित याचिका (PIL) की शुरुआत 1980 के दशक की शुरुआत में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर के प्रयासों से हुई। इसके तहत 'लॉस स्टैंडी' (यानी मुकदमा दायर करने का अधिकार केवल पीड़ित व्यक्ति को है) के कठोर नियम को शिथिल किया गया, ताकि समाज के कमजोर, वंचित और गरीबों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
Related Questions
→
भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणाली और सिक्कों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विजयनगर साम्राज्य में केंद्रीय प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी 'महामंडलेश्वर' होता था, जो सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी था, तथा संपूर्ण साम्राज्य को प्रांतों (मंडलों), जिन्हें 'वलनाडु' और 'नाडु' में विभाजित किया गया था, में प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से बांटा गया था।
2. विजयनगर साम्राज्य की आय का मुख्य स्रोत भू-राजस्व था, जिसे सामान्यतः उपज का एक-छठवां हिस्सा (1/6th) निर्धारित किया गया था, किंतु भूमि की उर्वरता, फसल के प्रकार और सिंचाई के साधनों (जैसे नहरें और तालाब जो स्थानीय नायकों द्वारा निर्मित होते थे) के आधार पर इसमें भिन्नता पाई जाती थी।
3. कृष्णदेवराय के शासनकाल में जारी किए गए प्रसिद्ध स्वर्ण सिक्के, जिन्हें 'पगोडा' या 'वाराह' कहा जाता था, साम्राज्य की अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता के प्रतीक थे, जिन पर अक्सर कन्नड़, तेलुगु या नागरी लिपि में देवी-देवताओं के चित्र तथा राजाओं के नाम अंकित होते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP) तथा उनके न्यायिक प्रवर्तन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग IV में अंतर्विष्ट नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) नहीं हैं।
2. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन के रथ के दो पहियों पर टिकी हुई है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर प्राथमिकता देने से संविधान का मूल ढाँचा नष्ट हो जाएगा।
3. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) और न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक्करण (अनुच्छेद 50) जैसे प्रावधान मूल संविधान में ही स्पष्ट रूप से शामिल किए गए थे, जिन्हें बाद में किसी भी संवैधानिक संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों तथा 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (ENSO) के प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की दिशा और गति मुख्य रूप से प्रचलित हवाओं, पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न कोरिओलिस बल (Coriolis Force), महाद्वीपीय तटों की आकृति और समुद्र के जल के तापमान एवं लवणता में भिन्नता के कारण उत्पन्न घनत्व प्रवणता द्वारा निर्धारित होती है।
2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिओलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा के दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जिसे 'फेरेल का नियम' भी कहा जाता है।
3. 'एल नीनो' (El Niño) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के पास) में उच्च वायुदाब और पूर्वी भाग (पेरू के तट के पास) में निम्न वायुदाब विकसित हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण अमेरिकी तट पर ठंडी जलधारा का प्रवाह बढ़ जाता है और भारत में मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार (NBA) की स्थापना जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत चेन्नई, तमिलनाडु में एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव विविधता से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को विनियमित करना है।
2. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत किसी भी भारतीय नागरिक या भारत में पंजीकृत कंपनी को अपने व्यावसायिक उपयोग के लिए देश के जैविक संसाधनों तक पहुँच प्राप्त करने से पहले राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
3. यह अधिनियम त्रि-स्तरीय विधिक और प्रशासनिक तंत्र की परल्पना करता है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार', राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) तथा स्थानीय स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) गठित की जाती हैं, जिनमें स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने के लिए 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करने की जिम्मेदारी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 105' और 'अनुच्छेद 194' के अंतर्गत सांसदों और विधायकों को प्राप्त 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105(3) के अनुसार, संसद के दोनों सदनों, उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ वही होंगी जो समय-समय पर ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स की थीं, जब तक कि भारतीय संसद द्वारा इस संबंध में कोई विशेष कानून नहीं बनाया जाता।
2. 'पी.वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई (1998)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(2) के अंतर्गत संसद के भीतर किसी भाषण देने या वोट देने के लिए रिश्वत लेने वाले सांसद को भी आपराधिक अभियोजन से पूर्ण संवैधानिक प्रतिरक्षा (Immunity) प्राप्त होती है, और इस पर साधारण आपराधिक कानून लागू नहीं हो सकते।
3. 'सीतामढ़ी मामले' (या हालिया सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के सात-न्यायाधीशों के फैसले) के संदर्भ में, न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती 1998 के फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट किया है कि रिश्वतखोरी के मामलों में सदन के भीतर वोट देने या भाषण देने के लिए घूस लेने वाले सांसदों और विधायकों को अनुच्छेद 105(2) या 194(2) के तहत कोई आपराधिक उन्मुक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि भ्रष्टाचार और आपराधिक कृत्य संसदीय लोकतंत्र के सुचारू संचालन और शुचिता के मूल सिद्धांतों के विपरीत हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.