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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (El Niño-Southern Oscillation - ENSO) और 'इंडियन ओशन डिपोल' (Indian Ocean Dipole - IOD) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल नीनो एक ऐसी घटना है जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर (पेरू के तट के पास) में सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाओं का दबाव बढ़ जाता है और देश में सामान्य से अधिक वर्षा होती है।
- 2. 'धनात्मक इंडियन ओशन डिपोल' (+IOD) की स्थिति में पश्चिमी हिंद महासागर (अफ़्रीकी तट के पास) का तापमान पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) की तुलना में अधिक हो जाता है, जो आमतौर पर भारत में मानसून की वर्षा को अनुकूल रूप से प्रभावित करता है।
- 3. जब प्रशांत महासागर में 'ला नीना' (La Niña) की स्थिति होती है और साथ ही हिंद महासागर में 'धनात्मक IOD' सक्रिय होता है, तो ये दोनों कारक संयुक्त रूप से भारत में मानसून के प्रदर्शन को और अधिक मजबूत करने में सहायक होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: एल नीनो (El Niño) के दौरान पूर्वी और केंद्रीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे वायुमंडलीय दबाव की स्थिति बदल जाती है। इसके परिणामस्वरूप भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाओं का प्रभाव कमजोर हो जाता है और भारत में सामान्य से कम (अक्सर सूखे जैसी स्थिति) वर्षा होती है, न कि सामान्य से अधिक। अतः पहला कथन असत्य है। कथन 2 सही है: धनात्मक इंडियन ओशन डिपोल (+IOD) के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर (अफ्रीका के पास) में जल का तापमान पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) की तुलना में अधिक गर्म हो जाता है। यह स्थिति पश्चिमी हिंद महासागर में वाष्पीकरण को बढ़ाती है और भारतीय उपमहाद्वीप की ओर नमी वाली हवाओं को आकर्षित करती है, जिससे भारत में मानसून की वर्षा अनुकूल रूप से बढ़ती है। कथन 3 सही है: ला नीना (जो प्रशांत महासागर में ठंडी परिस्थितियों को दर्शाता है और भारत के लिए अच्छा माना जाता है) और धनात्मक IOD (जो हिंद महासागर में अनुकूल है) दोनों का संयोजन भारत में सामान्य या उससे बेहतर मानसून वर्षा लाने के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'ज्वालामुखीयता' (Volcanism) और उससे निर्मित होने वाली 'आंतरिक एवं बाह्य आकृतियों' (Intrusive and Extrusive Landforms) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बथोलिथ' (Batholiths) बड़े पैमाने पर मैग्मा के ठंडे होने से बनी एक अंतर्भेदी (Intrusive) चट्टानी संरचना है, जो आमतौर पर ग्रेनाइट के रूप में पृथ्वी की गहराई में विशाल गुंबद के आकार में ठंडी होती है और यह विवर्तनिक रूप से सक्रिय पर्वतीय क्षेत्रों के मूल (Roots) का निर्माण करती है।
2. 'डाईक' (Dykes) मैग्मा के जमने से बनने वाली दीवार जैसी संरचनाएँ होती हैं, जो हमेशा तलछटी चट्टानों की परतों के समानांतर (Horizontal) रूप में क्षैतिज रूप से फैलती हैं, जबकि 'सिल्स' (Sills) या 'शीट' (Sheets) चट्टानी परतों के लंबवत (Vertical) या तिरछी दिशा में प्रवेश करती हैं।
3. 'काल्डेरा' (Caldera) अत्यधिक विस्फोटक प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार के पश्चात शंकु के धसने या विस्फोट से उड़ जाने के कारण बनने वाले विशालकाय गर्त होते हैं, जो क्रेटर (Crater) की तुलना में आकार में बहुत बड़े होते हैं और अक्सर इनमें वर्षा जल एकत्र होने से काल्डेरा झीलों का निर्माण होता है।
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