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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 75' के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति, मंत्रिपरिषद की संरचना और 'सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, और इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति किसी ऐसे व्यक्ति को भी प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, बशर्ते उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी एक सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी।
  2. 2. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और यह सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत केवल नीतिगत निर्णयों पर लागू होता है, व्यक्तिगत विभागों के प्रशासनिक कार्यों पर नहीं।
  3. 3. '91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003' द्वारा अनुच्छेद 75 में खंड (1A) जोड़ा गया, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और किसी राज्य की मंत्रिपरिषद के मामले में भी यह सीमा विधानसभा की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, बशर्ते न्यूनतम संख्या की कोई पाबंदी नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 75(1) के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं। संवैधानिक परंपरा और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, किसी ऐसे व्यक्ति को भी प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है जो उस समय संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं हो, बशर्ते उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी एक सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य बनना अनिवार्य होता है (उदाहरण के लिए एच.डी. देवेगौड़ा, मनमोहन सिंह आदि)। कथन 2 गलत है: मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75(3))। इसका अर्थ यह है कि मंत्रिमंडल का प्रत्येक निर्णय पूरी मंत्रिपरिषद का निर्णय माना जाता है और सभी मंत्री इसके लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं। लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित होना या नीतिगत मामले पर हार जाना पूरी सरकार का पतन माना जाता है। हालांकि, सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत केवल नीतिगत निर्णयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मंत्रियों के व्यक्तिगत विभागों के प्रशासनिक कार्यों पर भी समान रूप से लागू होता है, क्योंकि हर मंत्री अपने विभाग के कृत्यों के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी होता है। कथन 3 गलत है: 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार, प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी। इसी प्रकार राज्यों के लिए भी यह सीमा विधानसभा की कुल संख्या के 15% निर्धारित की गई है, किंतु राज्यों के मामले में एक अपवाद / न्यूनतम सीमा का प्रावधान भी है कि मुख्यमंत्री सहित राज्यों में मंत्रियों की कुल संख्या 12 से कम नहीं होगी (छोटे राज्यों जैसे सिक्किम, मिजोरम आदि को छोड़कर)। अतः कथन 3 का यह कहना कि 'न्यूनतम संख्या की कोई पाबंदी नहीं है' गलत है।
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