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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बॉन्ड' (Green Bonds) और भारत में उनके नियमन तथा विमोचन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हरित बॉन्ड एक प्रकार का निश्चित आय वाला साधन है जिसे विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं—जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ परिवहन—के वित्तपोषण के लिए धन जुटाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
  2. 2. भारत में सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जुटाई गई राशि को देश के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है और इसे सरकार के सामान्य बजट घाटे को पूरा करने के लिए किसी भी विकासात्मक या प्रशासनिक कार्य में उपयोग किया जा सकता है।
  3. 3. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कॉरपोरेट हरित बॉन्ड जारी करने वालों के लिए 'SEBI (सूचीकरण दायित्व और विमोचन आवश्यकताएँ) विनियम, 2015' के अंतर्गत हरित ऋण पत्रों के निर्गम और प्रकटीकरण के कड़े मानदंड निर्धारित किए हैं, ताकि 'ग्रीनवॉशिंग' (Greenwashing) की संभावना को रोका जा सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: हरित बॉन्ड (Green Bonds) ऐसे वित्तीय साधन होते हैं जिनका उपयोग विशेष रूप से पर्यावरण के अनुकूल, जलवायु-परिवर्तन को कम करने वाली या सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। कथन 2 गलत है: भारत के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क के अनुसार, इन बॉन्डों के माध्यम से जुटाई गई आय को सरकार के सार्वजनिक ऋण खाते (Public Debt Account) के तहत एक विशिष्ट निधि में अलग रखा जाता है, और इसका उपयोग केवल पात्र हरित परियोजनाओं (Eligible Green Projects) के वित्तपोषण या पुनर्वित्तपोषण के लिए ही किया जा सकता है। इसे समेकित निधि में सामान्य बजट घाटे को पाटने के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। कथन 3 सही है: सेबी (SEBI) ने 'SEBI (LODR) Regulations' के तहत हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के लिए विशिष्ट प्रकटीकरण मानक और दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं ताकि निवेशकों को सही जानकारी मिल सके और 'ग्रीनवॉशिंग' (कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों या नीतियों को पर्यावरण-अनुकूल बताने का झूठा दावा) को रोका जा सके।
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