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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' (Global Hunger Index - GHI) और इसके माप के संकेतकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) को प्रतिवर्ष 'कंसर्न वर्ल्डवाइड' (Concern Worldwide) और 'वेल्थुंगरहिल्फ' (Welthungerhilfe) नामक गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है।
- 2. इस सूचकांक की गणना चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर की जाती है: अल्पपोषण (Undernourishment), बाल वर्धापन (Child Wasting), बाल स्टंटिंग (Child Stunting), और बाल मृत्यु दर (Child Mortality)।
- 3. GHI स्कोर के निर्धारण में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित तीनों संकेतकों (स्टंटिंग, वर्धापन और मृत्यु दर) का भारांश (Weightage) कुल स्कोर का दो-तिहाई होता है, जबकि देश की कुल आबादी के अल्पपोषण का भारांश एक-तिहाई होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) एक सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) वार्षिक रिपोर्ट है जिसे आयरिश एनजीओ 'कंसर्न वर्ल्डवाइड' और जर्मन एनजीओ 'वेल्थुंगरहिल्फ' द्वारा संयुक्त रूप से तैयार और प्रकाशित किया जाता है। इसका उद्देश्य वैश्विक, क्षेत्रीय और देश स्तर पर भूख का व्यापक रूप से आकलन करना है। कथन 2 सही है: GHI स्कोर की गणना चार संकेतकों के आधार पर की जाती है: (1) अल्पपोषण (Undernourishment - जनसंख्या का वह हिस्सा जिसकी कैलोरी का सेवन अपर्याप्त है), (2) बाल स्टंटिंग (Child Stunting - 5 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे जिनकी लंबाई उनकी उम्र के हिसाब से बहुत कम है, जो दीर्घकालिक कुपोषण को दर्शाता है), (3) बाल वर्धापन (Child Wasting - 5 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे जिनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से बहुत कम है, जो तीव्र कुपोषण को दर्शाता है), और (4) बाल मृत्यु दर (Child Mortality - 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर)। कथन 3 सही है: इस सूचकांक में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जहाँ अल्पपोषण संकेतक का भारांश 1/3 (एक-तिहाई) होता है, जबकि बाल स्वास्थ्य से जुड़े तीनों संकेतकों (स्टंटिंग, वर्धापन और बाल मृत्यु दर) में से प्रत्येक का भारांश 1/6 होता है, जिससे मिलकर बच्चों से संबंधित संकेतकों का कुल भारांश 2/3 (दो-तिहाई) हो जाता है। अतः सभी तीनों कथन सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत राजभाषा (Official Language) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी, किंतु संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि (अर्थात 1965 तक) के लिए सभी राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जारी रखा जाएगा, जिसे संसद विधि द्वारा आगे बढ़ा सकती है।
2. अनुच्छेद 348 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियां, संसद के प्रत्येक सदन या राज्य के विधानमंडल द्वारा प्रस्तावित सभी विधेयकों के पाठ और अधिनियम केवल और केवल अंग्रेजी भाषा में ही होने अनिवार्य किए गए हैं, और राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना इसमें किसी अन्य भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संविधान संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 भाषा कर दिया गया है, और किसी भी भाषा को इस अनुसूची में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य संघ की लोक सेवा परीक्षाओं में उन भाषाओं को अनिवार्य माध्यम बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य विधायी संबंध - अनुच्छेद 245-255) और 'अवशिष्ट शक्तियों' (Residuary Powers) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार, संसद को संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून को इस आधार पर 'अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रभाव' (Extra-territorial operation) के लिए अमान्य नहीं ठहराया जा सकता है कि उसका प्रभाव भारत के भू-क्षेत्र से बाहर भी पड़ता है।
2. सातवीं अनुसूची की संघ सूची (List I), राज्य सूची (List II) और समवर्ती सूची (List III) में उल्लिखित विषयों के अतिरिक्त, वे सभी विषय जो किसी भी सूची में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं हैं, 'अवशिष्ट शक्तियाँ' (Residuary Powers) कहलाती हैं, और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के तहत इन अवशिष्ट विषयों पर कानून बनाने की अनन्य शक्ति केवल राज्य legislatures (राज्य विधानमंडलों) में निहित की गई है, न कि संसद में।
3. राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी ऐसे विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकता है जो उच्च न्यायालय की शक्तियों को इस प्रकार से कम करता हो कि वह संविधान द्वारा उच्च न्यायालय को प्रदत्त स्थिति को खतरे में डालता हो, तथा ऐसा करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (Article 32) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों (Legal Rights) के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
2. 'लोकू हित वाद' या 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) की अवधारणा को भारतीय न्यायशास्त्र में न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर द्वारा 1980 के दशक के शुरुआती वर्षों में विकसित किया गया था, जिसके तहत 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - वाद लाने का अधिकार) के पारंपरिक नियम को शिथिल किया गया ताकि समाज के वंचित और पीड़ित वर्गों की ओर से कोई भी सार्वजनिक हितैषी व्यक्ति या संस्था अदालत का दरवाजा खटखटा सके।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'कुचला कलिया पेरुमल बनाम महाराष्ट्र राज्य' और अन्य ऐतिहासिक निर्णयों में यह व्यवस्था दी है कि अनुच्छेद 32 स्वयं भारतीय संविधान के मूल ढांचा (Basic Structure) का एक अभिन्न अंग है, और इसलिए संसद द्वारा भी अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्राप्त संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान संशोधन के माध्यम से भी छीना या समाप्त नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'केंद्र-राज्य विधायी संबंधों' (Centre-State Legislative Relations) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अंतर्गत संसद को संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उनका बहिःक्षेत्रीय प्रभाव (Extraterritorial Operation) है।
2. संविधान की सातवीं अनुसूची के 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के किसी विषय पर यदि संसद द्वारा बनाया गया कोई कानून और किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाया गया कोई कानून आपस में संघर्ष की स्थिति में आते हैं, तो संसद द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होगा, भले ही राज्य के कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति पहले प्राप्त हो चुकी हो।
3. अनुच्छेद 249 के प्रावधानों के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर यह घोषित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में प्रयुक्त किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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