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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (El Niño-Southern Oscillation - ENSO) और 'इंडियन ओशन डिपोल' (Indian Ocean Dipole - IOD) के बीच की अंतःक्रिया (Interaction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सकारात्मक IOD (Positive IOD) की स्थिति के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर (أفريقي तट के पास) में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जबकि पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) में तापमान सामान्य से कम रहता है, जो सामान्यतः भारत में मानसूनी वर्षा को अनुकूल रूप से प्रभावित करता है।
- 2. जब प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' (El Niño) सक्रिय होता है, तो यह आमतौर पर भारत में मानसूनी वर्षा को कमजोर करता है, किंतु यदि उसी वर्ष हिंद महासागर में 'सकारात्मक IOD' भी सक्रिय हो जाए, तो वह अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को आंशिक रूप से संतुलित या कम कर सकता है।
- 3. 'ला नीना' (La Niña) की घटना केवल प्रशांत महासागर तक ही सीमित है और इसका हिंद महासागर के द्विध्रुव (IOD) के निर्माण या उसकी अवस्था (चरण) पर प्रत्यक्ष रूप से कोई भी सांख्यिकीय या भौतिक प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: सकारात्मक IOD के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर (पूर्वी अफ्रीका के तट के पास) में जल का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है जिससे वहाँ कम वायुदाब और अधिक वर्षा होती है, जबकि पूर्वी हिंद महासागर (सुमात्रा/इंडोनेशिया के पास) ठंडा हो जाता है। यह स्थिति भारतीय उपमहाद्वीप पर मानसूनी हवाओं को आकर्षित करने में सहायक होती है।
कथन 2 सही है: सकारात्मक IOD भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून के लिए एक अनुकूल कारक के रूप में कार्य करता है। यह अक्सर प्रशांत महासागर में अल नीनो के कारण होने वाले सूखे या कम बारिश के नकारात्मक प्रभाव को तटस्थ या आंशिक रूप से संतुलित (Mitigate) कर सकता है (जैसा कि वर्ष 1997 में देखा गया था)।
कथन 3 गलत है: ला नीना और ENSO की अन्य स्थितियाँ हिंद महासागर में वायुमंडलीय परिसंचरण और वाकर सर्कुलेशन (Walker Circulation) के माध्यम से IOD के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच जलवायु प्रणालियाँ पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि आपस में जुड़ी हुई हैं। अतः कथन 3 गलत है।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत' (Plate Tectonics Theory) और महाद्वीपीय विस्थापन तथा भूपटलिय संचलन के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी का स्थलमंडल (Lithosphere) कठोर स्लैब या 'विवर्तनिक प्लेटों' (Tectonic Plates) के रूप में विभाजित है, जो दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) के ऊपर तैरती हैं और इन प्लेटों की गति के तीन मुख्य प्रकार हैं: अभिसारी सीमाएँ (Convergent Boundaries), अपसारी सीमाएँ (Divergent Boundaries) और रूपांतरित सीमाएँ (Transform Boundaries)।
2. 'अपसारी सीमाओं' (Divergent Boundaries) पर प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, जिससे नए पर्पटी (Crust) का निर्माण होता है (जैसे मध्य-महासागरीय कटक - Mid-Oceanic Ridges), जबकि 'अभिसारी सीमाओं' (Convergent Boundaries) पर भारी महासागरीय प्लेट हल्की प्लेट के नीचे धंस जाती है जिसे 'सबडक्शन जोन' (Subduction Zone) कहा जाता है, जहाँ भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएँ सर्वाधिक होती हैं।
3. 'रूपांतरित सीमाओं' (Transform Boundaries) पर प्लेटें न तो नए क्रस्ट का निर्माण करती हैं और न ही किसी पुराने क्रस्ट का विनाश करती हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के समांतर क्षैतिज दिशा में फिसलती हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में तीव्र ज्वालामुखी विस्फोट और विवर्तनिक पर्वतमालाओं (जैसे हिमालय) का प्रत्यक्ष निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ - अनुच्छेद 308 से 323) के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) और लोक सेवा आयोगों के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अतिरिक्त किसी अन्य नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का प्रावधान कर सके, बशर्ते राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा की शर्तों का निर्धारण करने की अंतिम शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है, किंतु इन सेवाओं के अधिकारियों को उनके पद से हटाने या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार केवल संबंधित राज्य सरकार के पास होता है जहाँ वे सेवारत हैं, और केंद्र सरकार इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के किसी सदस्य को उसकी पदावधि की समाप्ति से पहले केवल राष्ट्रपति द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच रिपोर्ट के पश्चात ही हटाया जा सकता है, तथा UPSC के अध्यक्ष या सदस्य अपने पद से हटने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के नियोजन (Employment) के पात्र नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संसद' (अनुच्छेद 79 से 122) तथा 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges - अनुच्छेद 105) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के अनुसार संसद के प्रत्येक सदन को अपने सदस्यों के भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अतिरिक्त संसद में या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में कोई कार्यवाही न चलाए जाने का उन्मुक्ति अधिकार प्राप्त है।
2. जब संसद का सत्र चल रहा हो, तब संसद के किसी भी सदस्य को दीवानी मामलों (Civil Cases) में भी सदन के आरंभ होने से 40 दिन पूर्व और सदन की समाप्ति के 40 दिन पश्चात् तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है, और यह उन्मुक्ति आपराधिक मामलों (Criminal Cases) तथा निवारक नजरबंदी (Preventive Detention) के मामलों में भी समान रूप से पूर्णतः लागू होती है।
3. ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स की परंपरा के अनुसार भारतीय संसद और उसके सदस्यों के पास अनिश्चितकालीन और असीमित संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिन्हें न्यायालयों द्वारा किसी भी स्थिति में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में नहीं लाया जा सकता है, भले ही वे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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दलबदल निरोधक कानून (Anti-defection law) किस अनुसूची में वर्णित है?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत की 'भक्ति और सूफी परंपराओं' तथा उनके दार्शनिक आयामों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में उत्पन्न हुई भक्ति आंदोलन की धारा में अलवार (वैष्णव संत) और नयनार (शैव संत) संतों ने न केवल जातिगत और लैंगिक रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया, बल्कि तमिल भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देते हुए 'नालयिर दिव्य प्रबंधम' (Nalayira Divya Prabandham) जैसे ग्रंथों के माध्यम से भक्ति साहित्य को जन-जन तक पहुँचाया।
2. सूफी सिलसिले (Sufi Orders) के अंतर्गत 'चिश्ती सिलसिला' भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ, जिसकी स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, तथा इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण और शाही दरबारों से जुड़े रहना अनिवार्य माना ताकि वे राजनीतिक सत्ता के माध्यम से इस्लाम का प्रचार कर सकें।
3. विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध शासक कृष्णदेव राय के शासनकाल में तेलुगु साहित्य का 'प्रबंध काल' (Prabandha Period) स्वर्ण युग कहलाता था, और स्वयं कृष्णदेव राय ने 'अमुक्तमाल्यद' (Amuktamalyada) नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की, जिसमें अलवार संत पेरियालवार की पुत्री गोदा (आण्डाळ) के विवाह और दर्शन का वर्णन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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