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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं राष्ट्रीय आय के संदर्भ में, 'सकल घरेलू उत्पाद' (GDP) की गणना की विभिन्न पद्धतियों और 'सकल मूल्य वर्धित' (GVA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. व्यय विधि (Expenditure Method) के अंतर्गत GDP की गणना देश के भीतर एक निश्चित समयावधि में अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय के आधार पर की जाती है, जिसमें निजी अंतिम उपभोग व्यय, सरकारी अंतिम उपभोग व्यय, सकल घरेलू पूंजी निर्माण और शुद्ध निर्यात शामिल होते हैं।
- 2. सकल मूल्य वर्धित (GVA) बुनियादी कीमतों (Basic Prices) पर मापा जाता है, जो किसी अर्थव्यवस्था के विभिन्न उत्पादक क्षेत्रों (जैसे कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र) द्वारा किए गए कुल उत्पादन में से मध्यवर्ती उपभोग (Intermediate Consumption) के मूल्य को घटाकर निकाला जाता है।
- 3. बाजार मूल्य पर GDP (GDP at Market Prices) प्राप्त करने के लिए बुनियादी कीमतों पर GVA में 'उत्पाद करों' (Product Taxes) को जोड़ा जाता है और 'उत्पाद सब्सिडी' (Product Subsidies) को घटाया जाता है, जबकि इसमें 'उत्पादन करों' और 'उत्पादन सब्सिडी' का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: व्यय विधि के तहत GDP की गणना अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख घटकों के योग के रूप में की जाती है: निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE), सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE), सकल घरेलू पूंजी निर्माण (GFCF - निवेश), और शुद्ध निर्यात (निर्यात माइनस आयात)।
कथन 2 सही है: सकल मूल्य वर्धित (GVA) बुनियादी कीमतों (Basic Prices) पर मापा जाता है। यह किसी उद्यम, उद्योग या क्षेत्र द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य (Output) और उस उत्पादन प्रक्रिया में प्रयुक्त कच्चे माल तथा अन्य मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य (Intermediate Consumption) के बीच का अंतर होता है।
कथन 3 गलत है: बाजार मूल्य पर GDP (GDP at Market Prices) प्राप्त करने के लिए, बुनियादी कीमतों पर GVA में 'उत्पाद करों' को जोड़ा जाता है और 'उत्पाद सब्सिडी' को घटाया जाता है, साथ ही इसमें 'उत्पादन करों' (Production Taxes - जैसे भू-राजस्व, व्यावसायिक कर आदि) को जोड़ा जाता है और 'उत्पादन सब्सिडी' (Production Subsidies) को घटाया जाता है। अतः उत्पादन करों और सब्सिडी का भी प्रभाव पड़ता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों (Administrative Relations) तथा 'अखिल भारतीय सेवाओं' और 'अनुच्छेद 256', 'अनुच्छेद 257' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार, प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा कि वह संसद द्वारा बनाई गई विधियों का अनुपालन सुनिश्चित करे, और संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार राज्य को ऐसे निर्देश देने तक है जो इस प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हों।
2. अनुच्छेद 257 के तहत संघ की कार्यकारी शक्ति किसी राज्य को इस बात के लिए निर्देश देने का अधिकार देती है कि वह राज्य में संचार के किन साधनों (जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग या सैन्य महत्व के मार्ग) का निर्माण और रखरखाव करे, और यदि ऐसे निर्देशों के पालन में राज्य को कोई अतिरिक्त वित्तीय लागत आती है, तो केंद्र सरकार द्वारा उस लागत का वहन किया जाना अनिवार्य होता है।
3. यदि कोई राज्य भारत सरकार द्वारा दिए गए प्रशासनिक निर्देशों (Administrative Directions) का पालन करने में पूरी तरह विफल रहता है, तो अनुच्छेद 365 के उपबंधों के अनुसार राष्ट्रपति यह मान सकता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें उस राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती, जिससे राज्य में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, 'दीवान-ए-कोही' (Diwan-i-Kohi) विभाग की स्थापना, इसके उद्देश्यों तथा दिल्ली सल्तनत के किस सुल्तान से इसका संबंध है, के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस कृषि विभाग (Diwan-i-Kohi) की स्थापना तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब क्षेत्र में कृषि उत्पादन को बढ़ाने और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
2. इस योजना के तहत सरकार द्वारा सीधे किसानों को आर्थिक सहायता (तकावी ऋण या सौंदड़) प्रदान की जाती थी, ताकि वे बीज, बैल और कृषि उपकरण खरीद सकें।
3. हालांकि यह विभाग व्यापक प्रशासनिक योजना के तहत शुरू किया गया था, किंतु अत्यधिक भ्रष्टाचार, अधिकारियों की उदासीनता, खराब भूमि के चयन और दोआब क्षेत्र में पड़े भीषण अकाल के कारण यह योजना पूरी तरह असफल सिद्ध हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और इसकी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी ऐसे अपराध के लिए जिसमें दंड या वधियाज्ञा (Sentence of Death) दी गई है, क्षमा, प्रविराम, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का प्रयोग वह केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह के बिना अपने स्वविवेक से कर सकता है।
2. ऐतिहासिक 'इEकेरुद्दीन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य' तथा 'एतवा बरिया' जैसे मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर है और न्यायालय इस शक्ति के प्रयोग में राष्ट्रपति या सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की मनमानी या दुर्भावना के आधार पर समीक्षा नहीं कर सकता है।
3. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति और राज्यपाल की अनुच्छेद 161 के तहत प्रदत्त क्षमादान शक्ति के बीच एक मुख्य अंतर यह है कि राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह माफ कर सकता है और सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के विरुद्ध भी क्षमादान दे सकता है, जबकि राज्यपाल मृत्युदंड को माफ नहीं कर सकता और न ही सैन्य न्यायालय के निर्णयों पर क्षमादान दे सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग XI के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर सकती है कि संसद राष्ट्रीय हित में राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर कानून बना सकती है, जिसकी अधिकतम अवधि एक बार में पाँच वर्ष हो सकती है।
2. यदि दो या अधिक राज्यों के विधान-मंडल प्रस्ताव पास करके संसद से अनुरोध करें कि राज्य सूची के किसी विषय पर संसद कानून बनाए, तो ऐसा अधिनियम केवल उन्हीं राज्यों पर लागू होगा जिन्होंने ऐसा प्रस्ताव पारित किया है या बाद में उसे अंगीकृत (Adopt) करते हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) की संरचना, स्वतंत्रता और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की निष्कासन प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए जाने वाले अन्य निर्वाचन आयुक्तों का होना अनिवार्य किया गया है।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए लागू होते हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. संविधान निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं (योग्यता) को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है तथा निर्वाचन से निवृत्त होने वाले निर्वाचन आयुक्तों को सरकार द्वारा भविष्य में किसी भी प्रकार की नियुक्ति (सरकारी या गैर-सरकारी) प्राप्त करने से पूर्णतः प्रतिबंधित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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