त्वरित लिंक्स
Civil services
17 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' तथा रिट (Writ) अधिकारिता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसके तहत डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इसे 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा था, और इसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
- 2. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों तक ही सीमित है, जबकि उच्च न्यायालयों (High Courts) को अनुच्छेद 226 के तहत न केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर बल्कि 'अन्य किसी प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा के दौरान अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, भले ही राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 359 के तहत अन्य मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर दिया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए पाँच प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण) जारी करने की शक्ति प्राप्त है। डॉ. अंबेडकर ने इसे संविधान का हृदय और आत्मा कहा था।
कथन 2 सही है: सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन तक सीमित है (यह अनुच्छेद 32 के तहत मूल क्षेत्राधिकार है), जबकि उच्च न्यायालयों की अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट अधिकारिता अधिक व्यापक है क्योंकि वे मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'अन्य किसी प्रयोजन' (Ordinary legal rights) के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।
कथन 3 गलत है: राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश से अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित किया जा सकता है (सिवाय अनुच्छेद 20 और 21 के)। इसलिए यह कहना गलत है कि इसे 'किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता'। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं, इसलिए विकल्प (b) सही है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात राष्ट्रपति केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर ही आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके निरंतरता के अनुमोदन से संबंधित प्रत्येक प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम 'दो-तिहाई बहुमत' (Special Majority) द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य होता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभावी होने के दौरान, संविधान का 'अनुच्छेद 19' स्वतः निलंबित हो जाता है, जिसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी पृथक आदेश को जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की स्वायत्तता, शक्तियों और इसकी सेवा शर्तों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 (2) के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम का होना अनिवार्य है जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर 'उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश' को हटाया जाता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना किसी भी परिस्थिति में पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के पश्चात उनकी सेवा शर्तों में उनकी अनावर्ती (Disadvantageous) के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है, जिसका अर्थ यह है कि उनके कार्यकाल के दौरान उनके वेतन, भत्ते और अन्य लाभों में उनके प्रतिकूल संशोधन नहीं किया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत का प्रथम वायसराय कौन था?
→
दिल्ली सल्तनत का वह कौन सा शासक था जिसने बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया था?
→
शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21-A) संविधान में किस भाग का हिस्सा है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.