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Indian Polity
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भारतीय संविधान को तैयार करने में कितना समय लगा?

Detailed Explanation

संविधान निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे।
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→ भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में पारित 'चार्टर अधिनियम, 1833' (Charter Act of 1833) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया, और इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम व्यक्ति लॉर्ड विलियम बेंटिक थे, जिन्हें देश की नागरिक और सैन्य दोनों शक्तियाँ प्रदान की गईं। 2. इस एक्ट ने मद्रास और बंबई के गवर्नरों को उनकी विधाई शक्तियों से पूरी तरह वंचित कर दिया, और भारत के गवर्नर-जनरल को पूरे ब्रिटिश भारत के लिए विधाई अधिकार प्रदान किए गए। 3. इस अधिनियम के तहत कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को आंशिक रूप से समाप्त करते हुए इसे केवल चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार तक सीमित कर दिया गया, तथा ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरी तरह से एक प्रशासनिक और राजनीतिक निकाय बना दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है, किंतु राज्यों में पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों के संचालन के लिए अलग से राज्य निर्वाचन आयोगों का प्रावधान किया गया है। 2. वर्ष 1993 में संसद द्वारा अधिनियमित 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (सेवा शर्तें) अधिनियम' के माध्यम से निर्वाचन आयोग को एक स्थायी बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया गया, जिसमें यह प्रावधान किया गया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद होने पर आयोग का निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाएगा। 3. वर्ष 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की संस्तुति पर की जाती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों की प्रकृति, उनके अपवादों और न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा का आधार प्रदान करता है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई ऐसी कोई भी विधि जो मूल अधिकारों का अल्पीकरण करती है, शून्य (Void) होगी; किंतु सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) नहीं माना जा सकता और वे मूल अधिकारों को संशोधित करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं। 2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु राज्य इस अधिकार के प्रयोग पर किसी पेशेवर या तकनीकी अर्g (Professional or Technical Qualifications) के आवश्यक होने या राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या सेवा को पूर्णतः या भागतः अपने नियंत्रण में लेने के लिए कोई भी विधि बनाने से प्रतिबंधित नहीं है। 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' का अधिकार नागरिकों के साथ-साथ विदेशियों को भी समान रूप से उपलब्ध है, तथा उच्चतम न्यायालय ने 'मेनका गांधी वाद' (1978) में यह स्पष्ट किया कि 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत, निष्पक्षता और औचित्य का समावेश होना अनिवार्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद? → भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान गवर्नर जनरल काउंसिल के विधि सदस्य के रूप में कौन नियुक्त हुआ था ?
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