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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण' (Ocean Thermal Energy Conversion - OTEC) और इसके तकनीकी तथा पर्यावरणीय पहलुओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. OTEC तकनीक महासागरीय सतह के गर्म जल (जो सूर्य द्वारा गर्म होता है) और गहरे समुद्र के ठंडे जल के बीच के तापमान अंतर का उपयोग करके विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है, जिसके लिए सामान्यतः कम से कम 20 डिग्री सेल्सियस का तापमान अंतर आवश्यक होता है।
- 2. 'बंद चक्र' (Closed-cycle) OTEC प्रणालियों में, काम करने वाले तरल पदार्थ (Working fluid) के रूप में अमोनिया या क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे कम क्वथनांक वाले द्रवों का उपयोग किया जाता है, जो महासागरीय सतह के गर्म जल की ऊष्मा से वाष्पीकृत होकर टरबाइन को घुमाते हैं।
- 3. OTEC संयंत्रों के संचालन से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों में गहरे समुद्र के पोषक तत्वों से भरपूर ठंडे जल का सतह पर आना शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उत्पादकता (प्राकृतिक फाइटोप्लांकटोन प्रस्फूटन) में वृद्धि हो सकती है, किंतु इससे आसपास के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) तकनीक महासागरीय सतह के गर्म जल (लगभग 25°C) और गहरे समुद्र (लगभग 1000 मीटर नीचे) के ठंडे जल (लगभग 5°C) के बीच के तापमान अंतर (लगभग 20°C या अधिक) का उपयोग करती है।
कथन 2 सही है: 'बंद चक्र' (Closed-cycle) OTEC प्रणालियों में अमोनिया जैसे कम क्वथनांक वाले द्रवों का उपयोग किया जाता है। सतह के गर्म जल की ऊष्मा से यह द्रव वाष्प में बदल जाता है और टरबाइन को चलाता है, जिसके बाद गहरे समुद्र के ठंडे जल द्वारा इसे वापस संघनित (Condense) कर दिया जाता है।
कथन 3 गलत है: OTEC संयंत्रों के संचालन से गहरे समुद्र का पोषक तत्वों से युक्त जल सतह पर आता है, जिससे फाइटोप्लांकटोन की वृद्धि तो हो सकती है, किंतु इसके कई संभावित नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव भी होते हैं, जैसे गहरे समुद्र के जीवों का विस्थापन, थर्मल प्रदूषण, और अमोनिया जैसे जहरीले कार्यशील द्रवों के रिसाव का जोखिम। अतः यह कहना गलत है कि इससे कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और तीव्र निपटान के लिए की गई थी, जिससे भारत पर्यावरण मामलों के लिए विशेष न्यायाधिकरण स्थापित करने वाला विश्व का तीसरा देश (ऑस्ट्रिया और न्यूजीलैंड के बाद) बन गया।
2. अधिकरण के अध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के साथ परामर्श के पश्चात की जाती है, और अधिकरण के चेयरपर्सन या सदस्यों को उनकी पदावधि समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) का पात्र बनाया गया है।
3. NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं और साक्ष्य नियमों से कड़ाई से बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है, और इसके आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध केवल सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है, उच्च न्यायालयों में नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वल्लभभाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि किसने दी थी?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment - EIA) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित NGT एक विशेष निकाय है जो पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के प्रभावी व त्वरित निपटान के लिए कार्य करता है, तथा इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।
2. NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले किसी भी पर्यावरण संबंधी आदेश, निर्णय या पुरस्कार से व्यथित व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध 90 दिनों के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता इस अधिनियम के तहत वर्जित है।
3. पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) भारत में पहली बार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विधיक रूप से वर्ष 1994 में अधिसूचित किया गया था, और इसके तहत किसी भी नई विकास परियोजना के निर्माण से पहले उसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और इसके लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) देश का पहला राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसका उद्देश्य देश के विशिष्ट गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में वायु प्रदूषण को कम करना है।
2. इस कार्यक्रम का प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक आधार वर्ष (Baseline Year 2017) के मुकाबले देश के लक्षित शहरों में PM10 और PM2.5 सांद्रता में 20% से 30% तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
3. NCAP के तहत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शहरों को वित्तीय सहायता और प्रदर्शन-आधारित अनुदान केवल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के प्रत्यक्ष नियंत्रण और निगरानी के माध्यम से ही वितरित किए जाते हैं, और इसमें स्थानीय शहरी निकायों की कोई प्रत्यक्ष वित्तीय या प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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"Mission: Million Oak Trees by 2047" किस राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया है?
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