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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 75' (Article 75) और 'मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव (No-confidence Motion) के पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, भले ही वह नीतिगत मतभेद किसी एक विशिष्ट मंत्री से जुड़ा हो।
  2. 2. व्यक्तिगत रूप से मंत्रियों का उत्तरदायित्व राष्ट्रपति के प्रति होता है, अर्थात राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर किसी भी मंत्री को उस समय भी पदच्युत (Dismiss) कर सकता है जब संबंधित मंत्री को लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो।
  3. 3. 'सामूहिक उत्तरदायित्व' के सिद्धांत के तहत कैबिनेट के प्रत्येक निर्णय के लिए सरकार के सभी मंत्रियों (चाहे वे कैबिनेट मंत्री हों, राज्य मंत्री हों या उपमंत्री) को सार्वजनिक रूप से समर्थन देना अनिवार्य होता है, और यदि कोई मंत्री मंत्रिमंडल के किसी निर्णय से असहमत है तो उसे मंत्रिमंडल की बैठक के बाहर उसकी खुलकर आलोचना करने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि लोकसभा द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित किए जाने पर पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है, और यह 'एक के लिए सब और सब के लिए एक' के सिद्धांत पर कार्य करती है। कथन 2 सही है: व्यक्तिगत रूप से मंत्रियों का उत्तरदायित्व राष्ट्रपति के प्रति होता है (अनुच्छेद 75(2))। इसका अर्थ यह है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति किसी भी मंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं, भले ही उस मंत्री को संसद या लोकसभा का समर्थन प्राप्त हो। कथन 3 गलत है: 'सामूहिक उत्तरदायित्व' के सिद्धांत के तहत कैबिनेट के निर्णयों को सरकार के सभी मंत्रियों द्वारा सार्वजनिक रूप से समर्थित करना होता है (जिसे 'कैबिनेट उत्तरदायित्व' भी कहा जाता है)। यदि कोई मंत्री मंत्रिमंडल के किसी निर्णय से असहमत है, तो उसे मंत्रिमंडल की बैठक के भीतर अपनी असहमति व्यक्त करने की स्वतंत्रता होती है, लेकिन बैठक के बाहर या सार्वजनिक रूप से वह उसकी आलोचना नहीं कर सकता। यदि वह सार्वजनिक रूप से आलोचना करता है, तो उसे त्यागपत्र देना पड़ता है।
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