BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
1 views

सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवा मंच' (IPBES - Intergovernmental Science-Policy Platform on Biodiversity and Ecosystem Services) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. IPBES एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी निकाय है जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), यूनेस्को (UNESCO), खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा संयुक्त रूप से वर्ष 2012 में स्थापित किया गया था।
  2. 2. यह मंच केवल सरकारों को वैज्ञानिक आकलन प्रदान करता है और इसे औपचारिक रूप से 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' द्वारा स्थापित किया गया है, जिसके कारण यह सीधे संयुक्त राष्ट्र का एक अंग (Organ) है।
  3. 3. आईपीबीईएस (IPBES) द्वारा जारी वैश्विक आकलन रिपोर्ट ने यह चेतावनी दी है कि वर्तमान में लगभग 1 मिलियन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है, जिसका मुख्य कारण मानवीय गतिविधियाँ हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: IPBES (Intergovernmental Science-Policy Platform on Biodiversity and Ecosystem Services) की स्थापना वर्ष 2012 में एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी निकाय के रूप में की गई थी। इसके संस्थागत समर्थन के लिए UNEP, UNESCO, FAO और UNDP संयुक्त रूप से कार्य करते हैं। कथन 2 गलत है: यद्यपि आईपीबीईएस को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में स्थापित किया गया था और इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मान्यता प्राप्त है, किंतु यह सीधे संयुक्त राष्ट्र का औपचारिक अंग (UN Organ) नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र निकाय है। साथ ही, यह केवल सरकारों को ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और आम जनता को भी अपने वैज्ञानिक आकलन और निष्कर्ष उपलब्ध कराता है। कथन 3 सही है: IPBES द्वारा 2019 में जारी अपने ऐतिहासिक वैश्विक आकलन (Global Assessment Report) में यह चेतावनी दी गई थी कि प्रकृति का पतन मानव इतिहास में अभूतपूर्व गति से हो रहा है और लगभग 1 मिलियन (दस लाख) प्रजातियों के विलुप्त होने का आसन्न खतरा मंडरा रहा है।
Share:

Related Questions

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) की प्रकृति, इसकी सीमाओं और इससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उन्हें प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है जो लोक महत्व का है, तो वे उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करने के लिए उसे विचार हेतु संदर्भित कर सकते हैं। 2. यदि विधि या तथ्य का कोई प्रश्न अनुच्छेद 143(1) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भित किया जाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह वैधानिक रूप से अनिवार्य है कि वह उस पर अपनी राय राष्ट्रपति को दे, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई यह सलाह राष्ट्रपति के लिए हर स्थिति में बाध्यकारी होती है। 3. 'पूर्व-संविधान' (Pre-constitution) काल की संधियों, करारों, प्रसंविदाओं या अन्य इसी प्रकार के दस्तावेजों से उत्पन्न होने वाले विवादों के संबंध में, अनुच्छेद 143(2) के तहत राष्ट्रपति के लिए सर्वोच्च न्यायालय की राय लेना अनिवार्य है, और ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय भी अपनी राय राष्ट्रपति को देने के लिए बाध्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? सुमेलित कीजिए: A-2 (अलाई मीनार-अलाउद्दीन खिलजी), B-3 (फिरोजशाह कोटला-फिरोजशाह तुगलक), C-4 (तुगलकाबाद-गयासुद्दीन तुगलक), D-1 (दौलताबाद-मुहम्मद बिन तुगलक)। भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG - अनुच्छेद 148 से 151) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सीएजी (CAG) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र (Warrant) द्वारा की जाती है, तथा उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही प्रक्रिया और आधारों पर ही उनके पद से हटाया जा सकता है, अन्यथा नहीं। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का पद धारण करने वाला व्यक्ति अपनी सेवानिवृत्ति या कार्यकाल की समाप्ति के बाद भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए पूर्णतः पात्र होता है, क्योंकि संविधान इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है। 3. भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) के साथ-साथ प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (जहाँ विधानसभा है) की संचित निधि से होने वाले सभी खर्चों के लेखा-परीक्षण (Audit) की शक्ति सीएजी के पास है, तथा वे अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति और राज्यपालों के माध्यम से क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 359' के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के निलंबन (Suspension of Enforcement of Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के प्रवर्तन में रहने के दौरान आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) में से किसी भी अधिकार के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, तथा यह आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकता है। 2. '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया है कि अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाने वाला प्रत्येक आदेश संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाना आवश्यक है, अन्यथा वह आदेश जारी होने की तारीख से एक माह के भीतर निष्प्रभावी हो जाएगा। 3. अनुच्छेद 359 के अंतर्गत केवल 'अनुच्छेद 20' और 'अनुच्छेद 21' द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन को ही किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, चाहे आपातकाल बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? गौतम बुद्ध की मृत्यु (महापरिनिर्वाण) किस स्थान पर हुई थी?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.