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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'ओजोन परत क्षरण' (Ozone Layer Depletion) और 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' (Montreal Protocol) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों, विशेष रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलॉन और कार्बन टेट्राक्लोराइड के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए अपनाया गया था।
- 2. 'किगाली संशोधन (Kigali Amendment)' के माध्यम से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के दायरे का विस्तार किया गया है, जिसके तहत हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) को भी नियंत्रित पदार्थों की सूची में शामिल किया गया है, भले ही HFCs ओजोन परत को सीधे नुकसान नहीं पहुँचाते हैं, किंतु वे अत्यधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं।
- 3. अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र (Ozone Hole) के निर्माण के पीछे केवल मानव-निर्मित रसायन ही एकमात्र कारक हैं, और इसमें प्राकृतिक प्रक्रियाएं जैसे ध्रुवीय स्ट्रेटोस्फेरिक बादल (Polar Stratospheric Clouds) या सूर्य के प्रकाश की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) ओजोन परत को क्षीण करने वाले पदार्थों (ODSs) जैसे कि CFCs, हैलॉन आदि के वैश्विक उत्पादन और उपभोग को नियंत्रित और समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय पर्यावरणीय समझौता है। कथन 2 सही है: वर्ष 2016 में अपनाए गए किगाली संशोधन के तहत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) को भी नियंत्रित किया गया है। HFCs ओजोन परत को नष्ट नहीं करते हैं, लेकिन इनका ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) बहुत अधिक होता है। कथन 3 गलत है: अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र के निर्माण में मानव-निर्मित क्लोरीन और ब्रोमीन यौगिकों के साथ-साथ 'ध्रुवीय स्ट्रेटोस्फेरिक बादलों (PSCs)' और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति जैसी प्राकृतिक और मौसम संबंधी स्थितियां भी उत्प्रेरक की भूमिका निभाती हैं।
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मौर्योत्तर काल (Post-Maurya Period) की प्रमुख मूर्तिकला शैलियों—'गांधार शैली' (Gandhara School) और 'मथुरा शैली' (Mathura School)—के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधार कला शैली मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत और आधुनिक अफगानिस्तान के क्षेत्रों में विकसित हुई, जिसे मुख्य रूप से शकों और कुषाणों (विशेषकर कनिष्क) का संरक्षण प्राप्त हुआ, तथा इस शैली की मूर्तियों में यूनानी और रोमन कला का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है।
2. मथुरा कला शैली पूरी तरह से स्वदेशी शैली थी जो मथुरा के स्थानीय लाल बलुआ पत्थर (Spotted Red Sandstone) का उपयोग करके विकसित हुई, और इस शैली के अंतर्गत न केवल बौद्ध बल्कि जैन और ब्राह्मणवादी (हिंदू) देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी बड़े पैमाने पर बनाई गईं।
3. गांधार शैली और मथुरा शैली दोनों ने ही महात्मा बुद्ध की मानव रूप में पहली बार मूर्तियाँ बनाने का कार्य लगभग एक ही समय में (ईसा की पहली शताब्दी के आसपास) शुरू किया, और दोनों ही शैलियों में बुद्ध को हमेशा आध्यात्मिक और सारहीन रूप में ही दर्शाया गया है, बिना किसी शारीरिक मांसलता (Muscular body) के।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) तथा आपातकालीन प्रावधानों के तहत विधायी शक्तियों के वितरण के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और किसी भी संसदीय कानून को इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उसका 'अतिरिक्त प्रादेशिक विस्तार' (Extra-territorial operation) है।
2. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश के लिए कानून बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
3. जब भारत में अनुच्छेद 352 के तहत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) प्रवृत्त होता है, तब संसद को राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर पूरे या भारत के किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और आपातकाल की समाप्ति के पश्चात संसद द्वारा बनाए गए ऐसे कानून अनिश्चितकाल तक तब तक प्रभावी बने रहते हैं जब तक कि राज्य का विधानमंडल उन्हें निरस्त या संशोधित नहीं कर देता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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पृथ्वी के आकार को 'भू-आभ' (Geoid) क्यों कहा जाता है?
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भारतीय संविधान के भाग IX-B के अंतर्गत 'सहकारी समितियाँ' (Cooperative Societies) से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा संविधान में भाग IX-B जोड़ा गया, जिसके तहत अनुच्छेद 19(1)(c) में संशोधन करके सहकारी समितियाँ बनाने के अधिकार को एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) का दर्जा दिया गया तथा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 43-B जोड़ा गया।
2. इस संशोधन के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि किसी सहकारी समिति के निदेशक बोर्ड में सदस्यों की अधिकतम संख्या इक्कीस (21) से अधिक नहीं होगी, और इसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण की कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं रखी गई है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'राजीव जैन बनाम संघ और अन्य' तथा अन्य ऐतिहासिक निर्णयों में 97वें संविधान संशोधन के उस भाग को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, जो बहु-राज्य सहकारी समितियों (Multi-State Cooperative Societies) से संबंधित था, क्योंकि इसके लिए राज्यों के आधे विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन प्राप्त नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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