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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत दोनों सदनों की 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) की प्रक्रिया और उसके प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 108 दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधي विधेयकों (Ordinary Bills) और वित्तीय विधेयकों (Financial Bills श्रेणी-I) के मामले में करता है, जबकि यह प्रक्रिया धन विधेयकों (Money Bills) और संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) के संबंध में लागू नहीं होती है।
- 2. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और यदि राष्ट्रपति अनुपस्थित हो, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) या राज्यसभा के उपसभापति (Deputy Chairman) द्वारा क्रमानुसार इसकी अध्यक्षता की जाती है।
- 3. संयुक्त बैठक में किसी विधेयक पर निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले दोनों सदनों के सदस्यों के साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा लिया जाता है, जिसका अर्थ है कि संख्या बल अधिक होने के कारण लोकसभा का पलड़ा इस प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से भारी होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों के लिए है। धन विधेयक के मामले में लोकसभा के पास अंतिम शक्ति होती है, अतः वहां संयुक्त बैठक का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। संविधान संशोधन विधेयकों (अनुच्छेद 368) को भी दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित करना अनिवार्य है, इसलिए उनके लिए भी संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है। कथन 2 गलत है: संयुक्त बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रपति नहीं करता है। संविधान के अनुसार, लोकसभा का अध्यक्ष (Speaker) संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित है, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष और यदि वह भी अनुपस्थित है, तो राज्यसभा का उपसभापति अध्यक्षता करता है; सभापति (Chairman, Rajya Sabha) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता है। कथन 3 सही है: संयुक्त बैठक में विधेयक पर निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले दोनों सदनों के सदस्यों के साधारण बहुमत से लिया जाता है। चूंकि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या राज्यसभा से दोगुनी से अधिक है, इसलिए संयुक्त बैठक में सामान्यतः लोकसभा का पलड़ा भारी रहता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों से संबंधित) और 'भाग IX-A' (नगरपालिकाओं से संबंधित) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के संबंध में उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, जिन्हें लागू करना राज्य सरकारों के लिए पूरी तरह से अनिवार्य है, चाहे वे इसके लिए वित्तीय संसाधन हस्तांतरित करें या न करें।
2. अनुच्छेद 243-ZJ के अनुसार, सहकारी समितियों (Cooperative Societies) के बोर्ड के निदेशकों की अधिकतम संख्या 21 से अधिक नहीं होगी, तथा राज्य के विधान-मंडल द्वारा यह प्रावधान किया जाएगा कि प्रत्येक सहकारी समिति के बोर्ड में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए एक सीट और महिलाओं के लिए कम से कम दो सीटें आरक्षित रहेंगी।
3. 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee - DPC) का गठन संविधान के अनुच्छेद 243-ZD के तहत प्रत्येक राज्य में किया जाता है, जिसका मुख्य कार्य जिले के लिए विकास योजनाएं तैयार करना है, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-पांचवें (4/5th) सदस्य जिले में पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण और जैव विविधता के संदर्भ में, 'भारतीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) के गठन, संरचना और इसके कामकाज के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय वन्यजीव बोर्ड एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है, जिसकी स्थापना 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' के संशोधित प्रावधानों के तहत की गई है, और यह देश में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित नीतियों के निर्माण के लिए शीर्ष सलाहकार निकाय है।
2. इस बोर्ड के अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं, तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री इसके उपाध्यक्ष (Vice-Chairman) के रूप में कार्य करते हैं।
3. राष्ट्रीय पार्कों और वन्यजीव अभ्यारण्यों की सीमाओं के भीतर या उससे लगे हुए क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की विकासात्मक परियोजना या औद्योगिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति' (Standing Committee of NBWL) से पूर्व वन्यजीव clearance (वन्यजीव अनुमति) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) तथा उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 38 के अनुसार राज्य, लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था ताकि आय, प्रतिष्ठा और अवसरों की असमानताओं को कम किया जा सके।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कई नए निर्देश जोड़े गए थे, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A) तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवहन तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में एक नया निर्देश (अनुच्छेद 38 का खंड 2) जोड़ा गया, जिसके तहत यह अनिवार्य किया गया कि राज्य विशेष रूप से आय की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा और साथ ही प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को केवल व्यक्तियों के बीच ही नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे समूहों के बीच भी समाप्त करने का प्रयास करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संसद' (Parliament) तथा 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिनमें संसद के भीतर वाक् स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का अधिकार भी शामिल है, और इस अधिकार के तहत सदन में कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के लिए संसद सदस्य पर देश के किसी भी न्यायालय में कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।
2. जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो और राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 123 के तहत कोई अध्यादेश (Ordinance) प्रख्यापित किया जाता है, तो इस अध्यादेश को संसद की पुनर्बैठक के पश्चात दोनों सदनों द्वारा अनिवार्य रूप से अनुमोदित किया जाना होता है, और यदि संसद इस पर कोई विचार नहीं करती है, तो यह अध्यादेश संसद की बैठक पुनः आरंभ होने के 6 सप्ताह की समाप्ति पर अथवा दोनों सदनों द्वारा अस्वीकृत करने वाले संकल्प पारित किए जाने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
3. लोकसभा का अध्यक्ष (Speaker) अपने पद की शपथ देश के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नियुक्त किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष ग्रहण करता है, और लोकसभा विघटित होने के पश्चात भी नए अध्यक्ष का निर्वाचन होने तक नवनिर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक तक अपने पद पर बना रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की संरचना, अधिकारिता और उसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत को जापान और न्यूजीलैंड के बाद पर्यावरण से संबंधित विशेष न्यायालय स्थापित करने वाला विश्व का तीसरा तथा पहला विकासशील देश बनाता है।
2. NGT को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत निहित सिविल न्यायालय की प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होता है, और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) से बंधा हुआ नहीं है।
3. NGT के आदेशों या निर्णयों से व्यथित कोई भी व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के साठ दिनों के भीतर सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि इस अधिनियम के तहत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता को पूरी तरह से अपवर्जित कर दिया गया है।
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