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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय' (Supreme Court) की स्थापना, न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनकी स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) का मूल प्रावधान सीधे तौर पर संविधान के मूल पाठ में अनुच्छेद 124 के अंतर्गत उल्लिखित था, जिसे बाद में न्यायिक फैसलों के माध्यम से संशोधित किया गया।
  2. 2. उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों द्वारा समर्थित ऐसा समावेदन प्रस्तुत किए जाने पर ही हटाया जा सकता है, जो 'कदाचार' (Misbehaviour) या 'असमर्थता' (Incapacity) के आधार पर विशेष बहुमत द्वारा पारित किया गया हो।
  3. 3. उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भारत के किसी भी न्यायालय या प्राधिकरण (Authority) के समक्ष वकालत करने या अपनी प्रैक्टिस जारी रखने पर पूर्ण संवैधानिक प्रतिबंध (Total Constitutional Ban) है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) का प्रावधान मूल संविधान में नहीं था। इसे उच्चतम न्यायालय के विभिन्न न्यायाधीशों के मामलों (First, Second, and Third Judges Cases) में दिए गए निर्णयों के माध्यम से विकसित किया गया था, न कि संविधान के मूल पाठ द्वारा। कथन 2 सत्य है: संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, जिसके लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से समर्थित समावेदन राष्ट्रपति के समक्ष उसी सत्र में प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। यह आधार 'साबित कदाचार या असमर्थता' होता है। कथन 3 असत्य है: संविधान के अनुच्छेद 124(7) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय से सेवानिवृत्त होने वाले किसी भी व्यक्ति को भारत के किसी भी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण के समक्ष pleading या practice करने पर प्रतिबंध है, लेकिन यह प्रतिबंध 'उच्चतम न्यायालय के अतिरिक्त' अन्य न्यायालयों पर लागू होता है; अर्थात् सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत के किसी भी उच्च न्यायालय (High Court) में या उच्चतम न्यायालय के अलावा अन्य जगहों पर वकालत नहीं कर सकते, लेकिन वे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर सकते। हालांकि, यहाँ यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अनुच्छेद 124(7) स्पष्ट रूप से कहता है कि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष कोई भी व्यक्ति, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद धारण कर चुका है, वकालत या कार्य नहीं करेगा। अतः कथन 3 तकनीकी रूप से सही है कि सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय में वकालत नहीं कर सकते, लेकिन व्यापक रूप से 'किसी भी न्यायालय' के संदर्भ में यह आंशिक सत्य है, किंतु मुख्य रूप से कथन 1 और 3 के गलत होने के कारण केवल कथन 2 ही सही है।
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