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Indian Polity
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अनुच्छेद 356 क्या है?

Detailed Explanation

राष्ट्रपति शासन।
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→ शीशा (कांच) क्या है? → मूँगफली के टिक्का रोग का कारण कौन सा कवक है? → भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनके ऐतिहासिक विकास तथा उनकी विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में अंतःस्थापित किया गया था, और समिति ने करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था। 2. संविधान के अनुच्छेद 51क के तहत प्रदत्त मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, तथा इनकी प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, जिसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई नागरिक किसी मूल कर्तव्य का उल्लंघन करता है, तो उसे सीधे न्यायालय द्वारा दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके प्रवर्तन के लिए संसद द्वारा कोई विशिष्ट विधि न बनाई गई हो। 3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का दायित्व संबंधित माता-पिता या संरक्षक का होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग, अनुसूचियों और राजभाषा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, जबकि अंग्रेजी भाषा को इस अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ केवल हिंदी भाषा में ही संचालित की जाएंगी, और संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा विधि बनाकर अंग्रेजी के प्रयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है। 3. राजनीतिक दलों के पंजीकरण (Registration) और उन्हें 'राष्ट्रीय' या 'राज्यीय' दल के रूप में मान्यता देने की शक्ति भारत के निर्वाचन आयोग को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत प्राप्त है, तथा दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) तभी वैध माना जाता है जब उस दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के पक्ष में हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना में अभी तक केवल एक बार वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे। 2. 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है। 3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह प्रकृति में गैर-न्यायसंगत (Non-justiciable) है, अर्थात् इसके प्रावधानों को न्यायालयों में लागू नहीं कराया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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