त्वरित लिंक्स
Civil services
1 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, नियुक्ति और सेवा शर्तों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324(2) के अनुसार, निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (यदि कोई हों) से मिलकर बनेगा, जिनकी नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मूल संविधान में ही यह प्रावधान था कि आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) होगा।
- 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके कार्यकाल से कभी भी नहीं हटाया जा सकता है।
- 3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों दोनों को ही भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) वेतन एवं भत्ते प्राप्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 324(2) के तहत निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर नियुक्त अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलकर बनेगा, लेकिन मूल संविधान में निर्वाचन आयोग एक 'एक-सदस्यीय निकाय' (Single-member body) था। इसे पहली बार 1989 में बहु-सदस्यीय बनाया गया था। इसके अलावा, हालिया विधायी परिवर्तनों (मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023) से पहले इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती थी, न कि सीधे संसद की किसी विशेष विधि के अधीन मूल संविधान में उल्लिखित थी।
कथन 2 गलत है: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया (महाभियोग जैसी प्रक्रिया) के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। हालांकि, अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की 'संस्तुति' (Recommendation) पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, जिसका अर्थ यह है कि अन्य आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश अनिवार्य है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति के बिना राष्ट्रपति द्वारा हटाया ही नहीं जा सकता (राष्ट्रपति के पास संवैधानिक शक्ति है बशर्ते मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश हो)। मुख्य रूप से, अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी कठोर प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर्याप्त होती है।
कथन 3 गलत है: निर्वाचन आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा नहीं बल्कि **संसद द्वारा विधि बनाकर** निर्धारित की जाती हैं (अनुच्छेद 324(5))। साथ ही, वेतन और भत्ते भले ही संचित निधि पर भारित हों, किंतु मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की शक्तियों, स्वतंत्रता और सेवा शर्तों में कुछ अंतर (जैसे अन्य आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया की भिन्नता) और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में यह कथन पूरी तरह से सत्य नहीं है। अतः तीनों कथन असत्य हैं।
Related Questions
→
भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' (Soil Health Card - SHC) योजना और मृदा प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के सभी किसानों को उनकी कृषि योग्य भूमि की पोषक तत्व स्थिति का मूल्यांकन करके प्रत्येक दो वर्ष में एक बार कार्ड उपलब्ध कराना है।
2. इस कार्ड के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी में 12 प्रमुख मापदंडों (जिनमें मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, पीएच मान, विद्युत चालकता और जैविक कार्बन शामिल हैं) की स्थिति की जानकारी दी जाती है, तथा इसके आधार पर उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के विवेकपूर्ण उपयोग की संस्तुति की जाती है।
3. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वितीय चरण (Phase II) के अंतर्गत, सरकार ने देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना के साथ-साथ 'मॉडल ग्राम' (Model Village) स्तर पर मृदा नमون संग्रह और प्रदर्शन (Demonstration) कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' और 'भाग IX-क' के अंतर्गत 'पंचायतों' तथा 'नगरपालिकाओं' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के संबंध में कार्य करने की शक्ति और उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, जिन्हें लागू करना राज्य सरकारों के लिए संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
2. प्रत्येक पंचायत और नगरपालिका के निर्वाचन के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उनके चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण संबंधित राज्य के 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) में निहित होता है, जिसके अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया और आधारों के अलावा अन्य किसी प्रकार से पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, हर पांच वर्ष की समाप्ति पर, पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने तथा उनके बीच करों, शुल्कों और फीसों के बँटवारे की सिफारिश करने के लिए एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) का गठन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 25 और 26' के अंतर्गत प्रदत्त 'धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार' तथा इसके न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 25 न केवल अंतःकरण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है, बल्कि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन होने के साथ-साथ राज्य को किसी भी आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य धर्मनिरपेक्ष क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बंधन करने की शक्ति भी देता है।
2. ऐतिहासिक 'शिरूर मठ वाद (1954)' में उच्चतम न्यायालय ने 'आवश्यकता के सिद्धांत' (Doctrine of Essentiality) को प्रतिपादित किया था, जिसके तहत न्यायालय यह निर्धारित करता है कि कौन-ся धार्मिक अभ्यास या अनुष्ठान किसी धर्म का एक अनिवार्य (Essential) और अभिन्न हिस्सा है, और केवल उन्हीं अनिवार्य प्रथाओं को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होता है।
3. अनुच्छेद 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और दान प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने का अधिकार देता है, किंतु इसके तहत किसी भी धार्मिक संप्रदाय को अपनी धार्मिक मामलों के प्रबंधन के लिए अपनी संपत्ति का प्रशासन करने का अनन्य अधिकार प्राप्त है, और राज्य किसी भी विधि के माध्यम से इस प्रशासनिक शक्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
विषुवत वृत्त (Equator) के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
→
माउंट एटना ज्वालामुखी किस देश में स्थित है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.