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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्‍ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा, उसके संसदीय अनुमोदन और इसके परिणामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'दो महीने' के भीतर संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
  2. 2. यदि लोकसभा का विघटन उस दो महीने की अवधि के दौरान हो जाता है जिसके भीतर उद्घोषणा का अनुमोदन किया जाना आवश्यक है, तो ऐसी स्थिति में उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद उसकी पहली बैठक से '30 दिनों' तक जीवित रहती है, बशर्ते कि इस बीच राज्यसभा द्वारा इसे पहले ही अनुमोदित कर दिया गया हो।
  3. 3. राष्ट्रपति शासन के लागू होने पर राज्य सरकार के कार्यकारी और विधायी कार्यों को अपने हाथ में लेने के साथ-साथ राष्ट्रपति को यह पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है कि वह राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) की सभी न्यायिक और प्रशासनिक शक्तियों को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले ले तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को निलंबित या उनके अधिकारों में कटौती कर सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार, राष्ट्रपति शासन की प्रत्येक उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। यह अनुमोदन संसद के प्रत्येक सदन द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से किया जाता है। कथन 2 सही है: यदि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा ऐसे समय जारी की जाती है जब लोकसभा का विघटन हो गया है या लोकसभा का विघटन उस दो महीने की अवधि के भीतर हो जाता है, तो उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद उसकी पहली बैठक से 30 दिनों की समाप्ति तक जीवित रहती है, बशर्ते कि इस अवधि के समाप्त होने से पहले राज्यसभा द्वारा इसे अनुमोदित कर दिया गया हो। कथन 3 गलत है: राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राष्ट्रपति राज्य सरकार के कार्यकारी कार्यों और संसद राज्य के विधायी कार्यों को अपने हाथ में ले सकती है, किंतु राष्ट्रपति या केंद्र सरकार को राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) की संवैधानिक शक्तियों, क्षेत्राधिकार और उसकी स्थिति में हस्तक्षेप करने या उच्च न्यायालय को अपने नियंत्रण में लेने का कोई अधिकार नहीं है। संविधान के तहत उच्च न्यायालय की स्थिति और क्षेत्राधिकार अपरिवर्तित रहते हैं।
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