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भारतीय राजव्यवस्था और संसद की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 107' और 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत 'विधेयकों के व्यपगत होने' (Lapsing of Bills) के नियमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लोकसभा में लंबित कोई भी विधेयक, चाहे वह लोकसभा में ही पुनःस्थापित (Introduce) किया गया हो या राज्यसभा द्वारा पारित करके लोकसभा में भेजा गया हो, लोकसभा के विघटन (Dissolution) पर व्यपगत (Lapse) हो जाता है।
- 2. राज्यसभा में लंबित किंतु लोकसभा द्वारा पारित न किया गया कोई भी विधेयक, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है।
- 3. राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का आशय संसूचित किए जाने के पश्चात, यदि लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो भी वह संयुक्त बैठक निरस्त नहीं होती है और राष्ट्रपति विघटित लोकसभा के बावजूद संयुक्त बैठक आयोजित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार, लोकसभा में लंबित कोई भी विधेयक (चाहे वह मूल रूप से लोकसभा में शुरू हुआ हो या राज्यसभा से आया हो) लोकसभा के विघटन पर व्यपगत (Lapse) हो जाता है।
कथन 2 सही है: राज्यसभा में लंबित ऐसा विधेयक जो लोकसभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है। (इसके अतिरिक्त, यदि कोई विधेयक लोकसभा में लंबित था लेकिन राष्ट्रपति ने उसके संबंध में संयुक्त बैठक बुलाने की मंशा की अधिसूचना जारी कर दी है, तो भी वह विधेयक विघटन पर व्यपगत नहीं होता है)।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 108(5) के अनुसार, यदि राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने का आशय संसूचित किए जाने के पश्चात लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो संयुक्त बैठक आगे बढ़ सकती है और विधेयक पारित हो सकता है, लेकिन यह नियम केवल तभी लागू होता है जब आशय की सूचना पहले ही दी जा चुकी हो। हालांकि, सामान्य तौर पर संयुक्त बैठक का प्रावधान तभी लागू होता है जब विधेयक दोनों सदनों के बीच गतिरोध में हो। यहाँ मुख्य बात यह है कि संविधान के अनुच्छेद 107(5) के अनुसार, यदि राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक बुलाने का अपना आशय संसूचित कर दिया है, तो लोकसभा के विघटन से विधेयक व्यपगत नहीं होता है। परंतु कथन 3 में दी गई भाषा और वैधानिक स्थिति के अनुसार, संयुक्त बैठक तभी बुलाई जा सकती है जब गतिरोध उत्पन्न हुआ हो। सटीक नियमों के अनुसार कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 भ्रामक और गलत है क्योंकि संयुक्त बैठक का आह्वान केवल तभी किया जा सकता है जब गतिरोध हो और राष्ट्रपति आशय संसूचित कर चुका हो; अतः सही विकल्प (a) है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपातकालीन उपबंध' (Emergency Provisions - Articles 352-360) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, यदि उसे इस बात का समाधान हो गया है कि युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के कारण भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा है, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था।
2. अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि उस राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकता है, और इस प्रकार की घोषणा के अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे जारी होने की तारीख से दो माह के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जाना अनिवार्य होता है।
3. अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल की घोषणा करने की शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में है, तथा वित्तीय आपातकाल की घोषणा को भी संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदन मिलना आवश्यक होता है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह अनिश्चित काल तक तब तक प्रवृत्त रहता है जब तक कि राष्ट्रपति इसे स्वयं एक नई घोषणा द्वारा वापस नहीं ले लेता।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन' (Public Debt Management) और केंद्र सरकार की उधार लेने की रणनीतियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में केंद्र सरकार के आंतरिक ऋण का प्रबंधन मुख्य रूप से 'भारतीय रिजर्व बैंक' (RBI) द्वारा सरकार के बैंकर और ऋण प्रबंधक के रूप में किया जाता है, जिसके तहत RBI सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) के नीलामी संचालन और तरबियत नियंत्रण का कार्य करता है।
2. 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी' (Public Debt Management Agency - PDMA) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सरकारी ऋण प्रबंधन और मौद्रिक नीति संचालन के संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) को समाप्त करना था, और वर्तमान में PDMA पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से वित्त मंत्रालय के नियंत्रण से बाहर एक सांविधिक निकाय के रूप में कार्य करती है।
3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत केंद्र सरकार के लिए यह वैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया था कि वह वर्ष 2024-25 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 40% के लक्ष्य के भीतर केंद्र के ऋण और राजकोषीय घाटे को सीमित रखे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने किसे संविधान की 'हृदय और आत्मा' कहा था?
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किस पुर्तगाली यात्री ने कृष्णदेवराय के शासनकाल में विजयनगर की यात्रा की थी?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, 'गदर पार्टी' (Ghadar Party) और उसके इतिहास से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को (एस्टोरिया) में सोहन सिंह भाकना द्वारा की गई थी, और लाला हरदयाल इसके प्रमुख नेताओं और विचारकों में से एक थे जिन्होंने इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' के संपादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2. गदर पार्टी के सदस्यों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के लिए भारत में एक हिंसक सशस्त्र विद्रोह (Armed Revolution) भड़काना था, जिसके लिए उन्होंने पहले विश्व युद्ध के दौरान 'कोमागाटा मारू' घटना से प्रेरणा लेते हुए बड़े पैमाने पर धन जुटाया और विदेशों से हथियारों की तस्करी की।
3. प्रथम विश्व युद्ध के छिड़ जाने के बाद, गदर पार्टी ने अपने अधिकांश कार्यकर्ताओं को ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने और 'गदर क्रांति' को अंजाम देने के लिए चुपचाप भारत लौटने का आह्वान किया, किंतु खुफिया एजेंसियों द्वारा इस योजना का समय से पहले पता लगा लिए जाने के कारण यह विद्रोह बड़े पैमाने पर असफल हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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