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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रपति किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा केवल तभी कर सकता है जब उसे राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त होती है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन इस संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, और राज्यपाल की इस रिपोर्ट के बिना राष्ट्रपति अपनी प्रेरणा से यह उद्घोषणा नहीं कर सकता है।
- 2. राष्ट्रपति शासन की प्रत्येक उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तारीख से 'दो मास' के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, और यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद अपनी पहली बैठक से 30 दिनों तक प्रवृत्त बनी रहती है, बशर्ते इस बीच राज्यसभा द्वारा इसका अनुमोदन कर दिया गया हो।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के निर्णय के अनुसार, राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आती है, और यदि यह उद्घोषणा दुर्भावनापूर्ण (Mala fide) पाई जाती है या अप्रासंगिक आधारों पर आधारित होती है, तो न्यायालय विघटित विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है: अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल की रिपोर्ट मिलने पर 'या अन्यथा' (or otherwise) की जा सकती है। इसका अर्थ है कि राष्ट्रपति राज्यपाल की रिपोर्ट के बिना भी, यदि वह इस बात से संतुष्ट है कि राज्य का संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है, अपनी प्रेरणा (suo motu) से राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है। एस.आर. बोम्बाई वाद में भी इसे स्पष्ट किया गया था।
कथन 2 सत्य है: राष्ट्रपति शासन की प्रत्येक उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद उसकी पहली बैठक से 30 दिनों तक जीवित रहती है, बशर्ते इस बीच राज्यसभा ने इसे पहले ही अनुमोदित कर दिया हो।
कथन 3 सत्य है: 'एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन है। यदि न्यायालय यह पाता है कि उद्घोषणा दुर्भावनापूर्ण थी या अप्रासंगिक/तर्कहीन आधारों पर आधारित थी, तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है और यहाँ तक कि भंग या निलंबित की गई विधानसभा को पुनर्जीवित भी कर सकता है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) और 'नमामि गंगे कार्यक्रम' के प्रावधानों और संस्थागत तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की स्थापना 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' के अंतर्गत वर्ष 2011 में एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में की गई थी, जिसे बाद में 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (NGRBA) के स्थान पर गठित 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) के समग्र नियंत्रण और अधीक्षण के अधीन रखा गया है।
2. 'नमामि गंगे कार्यक्रम' एक समेकित केंद्रीय क्षेत्र की पहल (Central Sector Initiative - 100% funding by Central Government) है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से समाप्त करना तथा उसके संरक्षण और पुनर्जीवन को सुनिश्चित करना है, और इसके तहत नदी बेसिन में किसी भी राज्य सरकार या स्थानीय निकाय को वित्तीय सहायता प्रदान करने का कोई प्रावधान नहीं है।
3. राष्ट्रीय गंगा परिषद (NGC), जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री करते हैं, गंगा नदी बेसिन के प्रदूषण निवारण और पुनर्जीवन से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए सर्वोच्च नीति निर्माण निकाय है, और इसके सदस्यों में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रालयों के मंत्री शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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