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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति' (Advisory Jurisdiction of Supreme Court) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि उसे प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो लोक महत्व का है, तो वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय के लिए उसे विचारार्थ भेज सकता है।
- 2. यदि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय को परामर्श के लिए भेजा जाता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह उस पर अपनी राय राष्ट्रपति को संसूचित करे और राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए भी पूर्ण रूप से बाध्य होता है।
- 3. वर्ष 1950 से पूर्व की संधियों, समझौतों, प्रसंविदाओं या अन्य इसी प्रकार के अन्य दस्तावेजों से उत्पन्न विवादों के मामलों में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को परामर्श देना अनिवार्य (Obligatory) किया गया है, बशर्ते कि ऐसा विवाद संविधान के प्रारंभ से पहले उत्पन्न हुआ हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के अनुसार, राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है। यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो लोक महत्व का है, तो वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय ले सकता है।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 143 के तहत यदि विधि या तथ्य का सामान्य प्रश्न परामर्श के लिए भेजा जाता है, तो उच्चतम न्यायालय अपनी राय राष्ट्रपति को दे भी सकता है और मना भी कर सकता है (यह न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है, हालांकि सामान्यतः वह परामर्श देता है)। इसके अतिरिक्त, न्यायालय द्वारा दी गई सलाह (परामर्श) राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी (Binding) नहीं होती है, यानी राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए विवश नहीं है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 143 का दूसरा खंड यह प्रावधान करता है कि संविधान के प्रारंभ से पूर्व की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य समान दस्तावेजों से उत्पन्न विवादों के मामले में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य (Obligatory) है। यहाँ उच्चतम न्यायालय अपनी राय देने से इनकार नहीं कर सकता, यद्यपि यहाँ भी वह सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं होती है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 75' और 'अनुच्छेद 164' के अंतर्गत मंत्रियों की नियुक्ति, सामूहिक उत्तरदायित्व तथा मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 75 (1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करेगा, और मंत्रियों के रूप में शपथ लेने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह नियुक्ति के समय संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य हो।
2. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर केवल प्रधानमंत्री को त्यागपत्र देना पड़ता है, जबकि अन्य मंत्रियों के पद स्वतः समाप्त नहीं होते जब तक कि वे व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा न दें।
3. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, मंत्रिपरिषद की सलाह (Advice) जिसके आधार पर राष्ट्रपति या राज्यपाल अपने कृत्यों का निर्वाह करते हैं, उसे किसी भी न्यायालय में जांच के दायरे में नहीं लाया जा सकता है (अर्थात न्यायिक समीक्षा से उन्मुक्त है)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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पृथ्वी अपने अक्ष पर कितने डिग्री झुकी हुई है?
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स्टैफोर्ड क्रिप्स भारत कब आए थे?
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डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने किसे संविधान की 'हृदय और आत्मा' कहा था?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1928 में गठित 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) और इसकी संस्तुतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नेहरू रिपोर्ट ने भारत के लिए 'डोमिनियन स्टेटस' (Dominion Status) की मांग की थी, जिसे उस समय युवा राष्ट्रवादियों जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्वीकार कर लिया गया था क्योंकि उनका मानना था कि यह पूर्ण स्वराज की दिशा में पहला व्यावहारिक कदम है।
2. इस रिपोर्ट में देश के लिए एक नई संविधान रूपरेखा प्रस्तावित की गई थी जिसमें केंद्र में मजबूत शक्तियों के साथ एकात्मक झुकाव वाला संघीय ढांचा सुझाया गया था, तथा भाषाई आधार पर प्रांतों के पुनर्गठन की सिफारिश की गई थी।
3. धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संदर्भ में, नेहरू रिपोर्ट ने केंद्र और प्रांतीय विधानसभाओं में मुसलमानों के लिए किसी भी प्रकार के 'पृथक निर्वाचक मंडल' (Separate Electorates) के प्रावधान को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था, हालांकि इसने आबादी के अनुपात में अल्पसंख्यकों के लिए सीटों के आरक्षण की वकालत की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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