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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत राज्यों में आपातकालीन प्रावधानों और उनकी संवैधानिक सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत यह संघ की यह कर्तव्य बताया गया है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
- 2. राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की उद्घोषणा के पश्चात राज्य विधानसभा को या तो तुरंत विघटित कर दिया जाता है या निलंबित (Suspend) कर दिया जाता है, किंतु संसद द्वारा इस उद्घोषणा के दोनों सदनों से अनुमोदित होने से पूर्व राज्य विधानसभा को पूर्णतः विघटित नहीं किया जा सकता है।
- 3. एस.आर. बोम्मई वाद (1994) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा का न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) किया जा सकता है, और यदि न्यायालय को यह संतुष्टि हो जाती है कि उद्घोषणा का आधार अपर्याप्त या दुर्भावनापूर्ण था, तो न्यायालय विघटित विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है और निलंबित सरकार को बहाल कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 के अनुसार, यह केंद्र सरकार (संघ) का कर्तव्य है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार चल रहा है।
कथन 2 गलत है: राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा जारी होते ही राष्ट्रपति को यह शक्ति मिल जाती है कि वह राज्य विधानसभा को विघटित या निलंबित कर सके। इसके लिए संसद द्वारा उद्घोषणा के अनुमोदन की प्रतीक्षा करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, हालांकि संसद का अनुमोदन बाद में आवश्यक होता है। राष्ट्रपति उद्घोषणा के तुरंत बाद ही विधानसभा को निलंबित या विघटित कर सकता है।
कथन 3 सही है: एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की बेंच ने यह निर्णय दिया था कि अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायोचित (Justiciable) है और इसका न्यायिक पुनरावलोकन किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि उद्घोषणा असंवैधानिक पाई जाती है, तो न्यायालय निलंबित या विघटित की गई विधानसभा और मंत्रिपरिषद को पुनर्जीवित/बहाल कर सकता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र और राज्यों के बीच 'वित्तीय संबंधों' (Financial Relations - अनुच्छेद 268 से 293) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह उन राज्यों को, जिन्हें वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, संचित निधि से सहायता अनुदान (Grants-in-aid) दे सकती है, और इस प्रावधान के तहत विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की जा सकती है।
2. भारत के संविधान में यह स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि संघ सूची में शामिल किसी भी विषय पर संसद द्वारा लगाए जाने वाले और वसूले जाने वाले करों से प्राप्त होने वाला संपूर्ण राजस्व पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास ही रहता है, और उसका राज्यों के बीच कोई वितरण (Distribution) नहीं किया जा सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 289 के अनुसार, संघ की संपत्ति और आय को सभी प्रकार के राज्य करों (State taxes) से छूट प्राप्त है, चाहे वह संपत्ति या आय संघ द्वारा व्यापारिक गतिविधियों से ही क्यों न अर्जित की गई हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों— 'दोहरे खतरे से संरक्षण' (Protection against Double Jeopardy) और 'आत्म-अभिशंसन से संरक्षण' (Protection against Self-Incrimination) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 20(2) के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित किया जा सकता है, बशर्ते वह मामला विभिन्न न्यायालयों (जैसे दीवानी और आपराधिक न्यायालय) के बीच का हो।
2. अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त बनाए गए किसी भी व्यक्ति को अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देने (compelled to be a witness against himself) के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, और यह सुरक्षा मौखिक बयानों के साथ-साथ अभियुक्त के शरीर के नमूनों (जैसे रक्त, अंगूठे के निशान, और डीएनए) की अनिवार्य प्रस्तुति पर भी पूरी तरह से लागू होती है।
3. 'आत्म-अभिशंसन से संरक्षण' का यह अधिकार केवल आपराधिक मामलों (Criminal proceedings) में औपचारिक रूप से अभियुक्त व्यक्ति को ही उपलब्ध होता है, और यह किसी जांच या पूछताछ के दौरान दिए गए उन बयानों तक विस्तारित नहीं होता है जो औपचारिक आपराधिक विचारण (Trial) शुरू होने से पहले दर्ज किए गए हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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