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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' और 'अनुच्छेद 21' के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों तथा उनके आपातकालीन स्थगन (Suspension) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुच्छेद 20 के अंतर्गत 'दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण' प्रदान किया गया है, जिसके तहत पूर्वोत्तर (Ex-post facto laws), दोहरे दंड (Double jeopardy) और आत्म-अभिशंसन (Self-incrimination) से सुरक्षा मिलती है, और यह अधिकार राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता है।
- 2. 'मेनका गांधी वाद (1978)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 21 के तहत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के अधिकार में केवल शारीरिक अंगों का अस्तित्व ही नहीं, बल्कि मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है तथा 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure established by law) का अर्थ अमेरिकी 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due process of law) के समान ही निष्पक्ष और न्यायसंगत होना चाहिए।
- 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में, यहाँ तक कि अनुच्छेद 352 के तहत घोषित राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निलंबित (Suspend) नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान किया गया है (पूर्वव्यापी आपराधिक विधियों से संरक्षण, दोहरे दंड से संरक्षण और आत्म-अभिशंसन से संरक्षण)। 44वें संविधान संशोधन, 1978 के बाद से अनुच्छेद 20 और 21 के अधिकारों को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता है। कथन 2 सही है: मेनका गांधी वाद (1978) में सर्वोच्च न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' के पारंपरिक संकुचित अर्थ को व्यापक बनाते हुए इसे अमेरिकी 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due process of law) के लगभग निकट ला दिया, जिसके तहत कानून निष्पक्ष, न्यायसंगत और तर्कसंगत होना चाहिए। कथन 3 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू होने पर भी अनुच्छेद 20 और 21 के अंतर्गत मिलने वाले मौलिक अधिकार कभी भी निलंबित नहीं किए जाएंगे। अतः तीनों कथन सही हैं।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'पर्यावरण प्रभाव आकलन' (Environmental Impact Assessment - EIA) और भारत में इसकी वैधानिक प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) को कानूनी समर्थन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 (EIA Notification 2006) के माध्यम से प्राप्त होता है, जिसके तहत विकास परियोजनाओं को उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों के आधार पर 'श्रेणी A' और 'श्रेणी B' में वर्गीकृत किया जाता है।
2. 'श्रेणी A' की परियोजनाओं का पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) के लिए केंद्रीय स्तर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा गठित 'विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति' (EAC) द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जबकि 'श्रेणी B' की परियोजनाओं का मूल्यांकन राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा किया जाता है।
3. EIA अधिसूचना, 2006 के प्रावधानों के अनुसार, देश में किसी भी श्रेणी की नई विकास परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया में 'जन सुनवाई' (Public Hearing) का आयोजन करना हमेशा और सभी परिस्थितियों में अनिवार्य होता है, और इसमें किसी भी प्रकार की छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मौलिक अधिकार) के अंतर्गत 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) और 'मूलभूत संरचना सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के विकास के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 में न्यायिक समीक्षा की स्पष्ट संवैधानिक नींव प्रदान की गई है, जिसके अनुसार राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को छीनता है या न्यून करता है, और इस प्रकार का कोई भी कानून उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगा।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती वाद (1973) में पहली बार 'संविधान की मूलभूत संरचना' के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह मूलभूत संरचना का उल्लंघन न करे।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित 'मूलभूत संरचना' की सूची में न्यायिक समीक्षा की स्वतंत्रता, संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्रात्मक और गणराज्य रूप, तथा संघवाद जैसे तत्व शामिल हैं, किंतु 'संसदीय संप्रभुता' (Parliamentary Sovereignty) को इस मूलभूत संरचना का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत' (Plate Tectonics Theory) और महाद्वीपीय विस्थापन तथा भूपटलिय संचलन के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी का स्थलमंडल (Lithosphere) कठोर स्लैब या 'विवर्तनिक प्लेटों' (Tectonic Plates) के रूप में विभाजित है, जो दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) के ऊपर तैरती हैं और इन प्लेटों की गति के तीन मुख्य प्रकार हैं: अभिसारी सीमाएँ (Convergent Boundaries), अपसारी सीमाएँ (Divergent Boundaries) और रूपांतरित सीमाएँ (Transform Boundaries)।
2. 'अपसारी सीमाओं' (Divergent Boundaries) पर प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, जिससे नए पर्पटी (Crust) का निर्माण होता है (जैसे मध्य-महासागरीय कटक - Mid-Oceanic Ridges), जबकि 'अभिसारी सीमाओं' (Convergent Boundaries) पर भारी महासागरीय प्लेट हल्की प्लेट के नीचे धंस जाती है जिसे 'सबडक्शन जोन' (Subduction Zone) कहा जाता है, जहाँ भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएँ सर्वाधिक होती हैं।
3. 'रूपांतरित सीमाओं' (Transform Boundaries) पर प्लेटें न तो नए क्रस्ट का निर्माण करती हैं और न ही किसी पुराने क्रस्ट का विनाश करती हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के समांतर क्षैतिज दिशा में फिसलती हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में तीव्र ज्वालामुखी विस्फोट और विवर्तनिक पर्वतमालाओं (जैसे हिमालय) का प्रत्यक्ष निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) तथा इसके अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त 'स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार' को प्रभावी रूप से लागू करने तथा पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए की गई थी, और यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं एवं साक्ष्य नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य है।
2. अधिकरण के Chairperson (अध्यक्ष) या न्यायिक सदस्य (Judicial Member) के रूप में केवल उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहा हो, अथवा किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो, तथा इसके विशेषज्ञ सदस्यों (Expert Members) के पास पर्यावरण विज्ञान, वानिकी, या संबंधित क्षेत्रों में उच्च शैक्षणिक योग्यता और कम-से-कम पंद्रह वर्ष का व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों से व्यथित कोई भी व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध नब्बे दिनों की अवधि के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि इस अधिकरण के आदेशों के न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अधिकार केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पास निहित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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1857 का विद्रोह आधिकारिक रूप से कहाँ से प्रारंभ हुआ था?
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