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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, 'वर्ष 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार' (Montagu-Chelmsford Reforms) और 'भारत सरकार अधिनियम, 1919' के प्रावधानों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अधिनियम के तहत केंद्र में द्विसदनीय विधायिका (Bicameral Legislature) की स्थापना की गई, जिसमें ऊपरी सदन को 'राज्य परिषद' (Council of State) और निचले सदन को 'केंद्रीय विधानसभा' (Central Legislative Assembly) कहा गया, और दोनों सदनों के सदस्यों का कार्यकाल क्रमशः 5 वर्ष और 3 वर्ष निर्धारित किया गया था।
- 2. इस अधिनियम द्वारा प्रांतों में 'द्वैध शासन' (Dyarchy) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत प्रांतीय विषयों को दो भागों—'आरक्षित' (Reserved) और 'हस्तांतरित' (Transferred) में विभाजित किया गया, जहाँ 'आरक्षित' विषय गवर्नर के अधीन होते थे और उनके प्रशासन के लिए वह विधान-परिषद के प्रति उत्तरदायी होता था।
- 3. भारत सरकार अधिनियम, 1919 के प्रावधानों के तहत ही पहली बार देश में सीमित आधार पर महिलाओं को मताधिकार प्रदान किया गया और सांप्रदायिक आधार पर निर्वाचन प्रणाली का विस्तार करते हुए इसे सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन और यूरोपियनों के लिए भी अलग से आरक्षित कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा केंद्र में द्विसदनीय विधायिका (Bicameralism) की शुरुआत की गई। ऊपरी सदन 'राज्य परिषद' (Council of State) का कार्यकाल 5 वर्ष और निचले सदन 'केंद्रीय विधानसभा' (Central Legislative Assembly) का कार्यकाल 3 वर्ष था।
कथन 2 गलत है: प्रांतों में द्वैध शासन के अंतर्गत 'आरक्षित' (Reserved) विषयों का प्रशासन गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद द्वारा किया जाता था, और गवर्नर इस प्रशासन के लिए प्रांतीय विधान-परिषद के प्रति **उत्तरदायी नहीं** था, जबकि 'हस्तांतरित' (Transferred) विषयों का प्रशासन मंत्रियों की सहायता से किया जाता था जो विधान-परिषद के प्रति उत्तरदायी थे।
कथन 3 सही है: इस अधिनियम के द्वारा देश में पहली बार महिलाओं को सीमित मताधिकार प्रदान किया गया। साथ ही, 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों द्वारा मुसलमानों के लिए शुरू की गई पृथक निर्वाचन प्रणाली का विस्तार करते हुए इसे सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन और यूरोपियनों के लिए भी लागू किया गया।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, पृथ्वी की आंतरिक संरचना (Interior of the Earth) और भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) ध्वनि तरंगों के समान अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, तथा इनका वेग अन्य भूकंपीय तरंगों (S-waves और Surface waves) की तुलना में सबसे अधिक होता है।
2. द्वितीयक तरंगें (S-waves) प्रकाश तरंगों के समान अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं और तरल माध्यम में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं, जिसके कारण वैज्ञानिकों को पृथ्वी के बाह्य क्रोड (Outer Core) के तरल होने का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
3. गुटेनबर्ग असांतत्य (Gutenberg Discontinuity) पृथ्वी के क्रस्ट (Crust) और मेंटल (Mantle) के बीच की सीमा को पृथक करता है, जबकि लेहमैन असांतत्य (Lehmann Discontinuity) बाह्य क्रोड और आंतरिक क्रोड के बीच स्थित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' एक सांविधिक (Statutory) निकाय है, जिसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है, और यह देश में जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को विनियमित करता है।
2. यह अधिनियम केवल विदेशी नागरिकों, कंपनियों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए ही जैविक संसाधनों तक पहुँच या बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के पंजीकरण से पहले NBA की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य बनाता है, जबकि भारत के नागरिकों और देश में पंजीकृत भारतीय कंपनियों को किसी भी स्थिति में जैविक संसाधनों का उपयोग करने के लिए NBA या राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) की पूर्व अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
3. जैविक विविधता अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक स्थानीय निकाय स्तर पर 'जैविक विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिनका मुख्य कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का प्रलेखन करके 'जन जैव विविधता रजिस्टर' (People's Biodiversity Register - PBR) तैयार करना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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