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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संसद' (Parliament) तथा 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 105 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिनमें संसद के भीतर वाक् स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का अधिकार भी शामिल है, और इस अधिकार के तहत सदन में कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के लिए संसद सदस्य पर देश के किसी भी न्यायालय में कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।
- 2. जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो और राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 123 के तहत कोई अध्यादेश (Ordinance) प्रख्यापित किया जाता है, तो इस अध्यादेश को संसद की पुनर्बैठक के पश्चात दोनों सदनों द्वारा अनिवार्य रूप से अनुमोदित किया जाना होता है, और यदि संसद इस पर कोई विचार नहीं करती है, तो यह अध्यादेश संसद की बैठक पुनः आरंभ होने के 6 सप्ताह की समाप्ति पर अथवा दोनों सदनों द्वारा अस्वीकृत करने वाले संकल्प पारित किए जाने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
- 3. लोकसभा का अध्यक्ष (Speaker) अपने पद की शपथ देश के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नियुक्त किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष ग्रहण करता है, और लोकसभा विघटित होने के पश्चात भी नए अध्यक्ष का निर्वाचन होने तक नवनिर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक तक अपने पद पर बना रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद के सदनों, उनके सदस्यों और समितियों के विशेषाधिकारों का उल्लेख है। अनुच्छेद 105(1) के अनुसार संसद में वाक् स्वतंत्रता होगी, और अनुच्छेद 105(2) के अनुसार संसद में या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में संसद के किसी भी सदस्य के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।
कथन 2 सही है: संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश की शक्ति वही होती है जो संसद द्वारा बनाई गई विधि की होती है। ऐसे प्रत्येक अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत होने पर उसके दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना अनिवार्य है। यदि संसद दोनों सदनों द्वारा इसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देती है या संसद की पुनर्रंभ बैठक से 6 सप्ताह की अवधि समाप्त होने से पहले यह स्वीकृत नहीं होता है, तो यह निष्प्रभावी हो जाता है।
कथन 3 गलत है: लोकसभा का अध्यक्ष (Speaker) अपने पद की रूप से कोई 'पृथक शपथ' ग्रहण नहीं करता है। वह संसद के एक साधारण सदस्य के रूप में ही शपथ ग्रहण करता है (जो वह भारत के राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष लेता है)। अध्यक्ष पद के रूप में उसकी कोई अलग से शपथ नहीं होती है। हालांकि, यह कथन सही है कि लोकसभा के विघटन के ठीक पहले तक अध्यक्ष अपने पद पर बना रहता है और वह तब तक पद खाली नहीं करता जब तक कि नए सदन की पहली बैठक से ठीक पहले तक चुनाव न हो जाए (अनुच्छेद 93 और 94)। चूंकि कथन 3 का पहला भाग गलत है कि वह अध्यक्ष पद की शपथ मुख्य न्यायाधीश के समक्ष लेता है, अतः यह पूरा कथन असत्य है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'प्रशासनिक संबंधों' (Administrative Relations - अनुच्छेद 256 से 263) तथा केंद्र-राज्य वित्तीय व प्रशासनिक शक्तियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, और संघ की कार्यकारी शक्ति राज्य को ऐसे निर्देश देने तक विस्तारित होती है जो इस प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हों।
2. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, उन पर बहस करना तथा ऐसे विषयों पर संस्तुति करना है जिनमें राज्यों के साझा हित हों।
3. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार दो या अधिक राज्यों के लिए एक संयुक्त लोक सेवा आयोग (Joint State Public Service Commission) का गठन संसद द्वारा किया जा सकता है, बशर्ते संबंधित राज्यों के विधानमंडल इस आशय के संकल्प पारित कर दें, और इस संयुक्त आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान मुद्रा प्रणाली (Currency System) और आर्थिक सुधारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में तांबे के सिक्के को 'जीतल' (Jital) कहा जाता था, जबकि चांदी के सिक्के को 'टंका' (Tanka) के रूप में जाना जाता था, और इन दोनों के बीच का मौद्रिक अनुपात इल्तुतमिश के शासनकाल में पहली बार मानकीकृत किया गया था।
2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा शुरू की गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) प्रणाली के तहत तांबे और पीतल के सिक्कों का मूल्य सोने और चांदी के सिक्कों के बराबर कर दिया गया था, किंतु राज्य द्वारा सिक्कों के उत्पादन पर राजकीय एकाधिकार (State Monopoly) न होने के कारण बड़े पैमाने पर जाली सिक्कों (Counterfeit Coins) का निर्माण होने लगा, जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
3. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सैन्य सुधारों और बाजार नियंत्रण नीति को सफल बनाने के लिए वस्तुओं के मूल्यों को सख्ती से नियंत्रित किया था, तथा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने सभी प्रकार के सोने, चांदी और तांबे के सिक्कों के प्रचलन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर केवल वस्तु-विनिमय (Barter System) प्रणाली को अनिवार्य कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' के अंतर्गत प्रदोष सिद्धि के विरुद्ध संरक्षण (Protection in respect of conviction for offences) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 20(1) किसी भी व्यक्ति को 'पूर्व-दा्रशिक कानून' (Ex-post facto law) से संरक्षण प्रदान करता है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को किसी ऐसे कार्य के लिए जो उसके किए जाने के समय अपराध नहीं था, किसी भी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता और न ही उस अपराध के लिए निर्धारित सजा से अधिक सजा दी जा सकती है, तथा यह सुरक्षा आपराधिक और दीवानी (Civil) दोनों प्रकार के कानूनों पर समान रूप से लागू होती है।
2. अनुच्छेद 20(2) 'दोहरे खतरे' (Double jeopardy) के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है, जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता है, किंतु यह सुरक्षा केवल न्यायिक न्यायालयों या अधिकरणों (Tribunals) के समक्ष की गई कार्रवाई तक सीमित है और विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकारियों द्वारा दी गई अनुशासनिक कार्रવાियों पर लागू नहीं होती है।
3. अनुच्छेद 20(3) किसी भी व्यक्ति को 'स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने' (Self-incrimination) के लिए बाध्य करने से रोकता है, जिसका अर्थ है कि यह सुरक्षा किसी भी आपराधिक मामले के अभियुक्त को किसी भी प्रकार की मौखिक या दस्तावेजी गवाही देने से पूर्णतः मुक्त करती है, जिसमें पुलिस हिरासत के दौरान उसके शरीर के नमूने (जैसे DNA, हस्ताक्षर या अंगुलियों के निशान) लेना भी शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' (Biological Diversity Act, 2002) और उससे जुड़े संस्थागत तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 रियो डी जेनेरियो में आयोजित 'जैविक विविधता पर कन्वेंशन' (CBD) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अधिनियमित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य जैविक संसाधनों का संरक्षण, उनके घटकों का सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों का न्यायसंगत और निष्पक्ष बंटवारा करना है।
2. इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) की स्थापना की जाती है, जो कि एक सांविधिक निकाय है, तथा यह प्राधिकरण विदेशी नागरिकों, निगमों या अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा किसी भी जैविक संसाधन को प्राप्त करने या जैव-सर्वेक्षण करने के लिए पूर्व अनुमति देना अनिवार्य बनाता है।
3. इस त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर गठित 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) आती हैं, जिनमें 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' को देश के सभी क्षेत्रों में जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Sites) घोषित करने की अनन्य और अंतिम शक्ति प्राप्त होती है, जिसमें राज्य सरकारों की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 312' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के सृजन और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ और राज्यों के लिए संयुक्त रूप से एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा शामिल हैं) का सृजन कर सके, बशर्ते कि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है।
2. भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service - IFS) को वर्ष 1966 में 'अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951' के तहत संसद द्वारा एक नई अखिल भारतीय सेवा के रूप में सृजित किया गया था, और वर्तमान में संविधान के तहत कुल चार (4) अखिल भारतीय सेवाएं अस्तित्व में हैं।
3. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की सेवा की शर्तें और उनके वेतन-भत्ते आदि संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, किंतु इन सेवाओं के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण (Disciplinary Control) और अंतिम दंडात्मक कार्रवाई करने की शक्ति केवल संबंधित राज्य सरकारों के पास होती है, केंद्र सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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