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सबसे हल्का तत्व कौन सा है?

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हाइड्रोजन आवर्त सारणी का सबसे हल्का तत्व है।
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पारिस्थितिकीय पिरामिड (Ecological Pyramids) और उनके प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा होता है, क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह एकमार्गीय होता है और लिंडेनमैन के 10 प्रतिशत नियम (10% Law) के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर जाने पर ऊर्जा का ह्रास होता है। 2. जलीय पारितंत्र (Aquatic Ecosystem) में संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers) सदैव उल्टा होता है, क्योंकि प्राथमिक उत्पादक (फाइटोप्लांकटन) की संख्या शाकाहारी जंतुओं (जूप्लांकटन) और मछलियों की तुलना में कम होती है। 3. वृक्ष पारितंत्र (Tree Ecosystem) में जैवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass) उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) का जैवभार उस पर निर्भर रहने वाले शाकाहारी जीवों (पक्षियों और कीटों) की कुल मात्रा से बहुत अधिक होता है। 4. बायोम या वन पारितंत्र में ऊर्जा और जैवभार दोनों के पिरामिड सामान्यतः सीधे होते हैं, किंतु समुद्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा पाया जा सकता है क्योंकि वहाँ फाइटोप्लांकटन का अल्पकालिक जैवभार जलीय जीवों के जैवभार से कम होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? बिहार के कृषि और पशुपालन क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बिहार सरकार की 'कृषि रोड मैप' (Agriculture Road Map) पहल के तहत राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management), कृषि यंत्रीकरण और जैविक कॉरिडोर योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके तहत गंगा नदी के दोनों किनारों के जिलों में जैविक खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। 2. राज्य में मक्का, धान और गेहूं के प्रमाणित बीजों के उत्पादन और वितरण को सुचारू बनाने के लिए 'बिहार राज्य बीज निगम' (Bihar State Seeds Corporation) द्वारा कार्य किया जाता है, तथा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत कम पानी की खपत वाली फसलों की खेती पर जोर दिया जा रहा है। 3. पशुपालन और डेयरी विकास के क्षेत्र में 'मुख्यमंत्री तीव्र आर्दश पशुपालन योजना' के तहत दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए गोवंश और भैंस वंश की उच्च नस्लों के कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) और 'कॉम्प्रिहेंशिव मिल्क प्रोडक्शन' को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें 'कॉम्फेड' (COMFED - Sudha Dairy) की महत्वपूर्ण भूमिका है। 4. बिहार में पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण और खुरपका-मुँहपका (FMD) तथा गलघोटू (HS) जैसी संक्रामक बीमारियों के टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और इसके स्थान पर केवल पारंपरिक देशी नुस्खों का उपयोग किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? हाल ही में जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index - GII) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा प्रकाशित वैश्विक नवाचार सूचकांक 2024 में स्विट्जरलैंड ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जबकि भारत को इस सूचकांक में 39वां स्थान प्राप्त हुआ है। 2. यह सूचकांक अर्थव्यवस्थाओं की नवाचार क्षमताओं का मूल्यांकन करने के लिए केवल वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन और पेटेंट आवेदनों की संख्या को आधार बनाता है, तथा इसमें संस्थागत गुणवत्ता या बाजार परिपक्वता जैसे संकेतकों को शामिल नहीं किया जाता है। 3. भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सेवाओं के निर्यात, घरेलू बाजार के आकार और रचनात्मक वस्तुओं के निर्यात जैसे संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार प्रदर्शित किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1855-56 में हुए संथाल हूल (विद्रोह) का नेतृत्व सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव नामक चार भाइयों ने किया था, तथा इस विद्रोह का प्रमुख केंद्र भगनाडीह था। 2. बिरसा मुंडा के नेतृत्व में चलाए गए 'उलगुलान' (महाविद्रोह) का मुख्य उद्देश्य मुंडा राज की स्थापना करना और दिकुओं (बाहरी लोगों) व अंग्रेजों के शोषणकारी भू-राजस्व व्यवस्था को उखाड़ फेंकना था। 3. वर्ष 1914 में झारखंड और बिहार के क्षेत्र में जतरा भगत के नेतृत्व में शुरू हुए 'ताना भगत आंदोलन' ने गांधीवादी असहयोग आंदोलन से बहुत पहले ही अहिंसा, सत्याग्रह और ब्रिटिश विरोधी लगान बहिष्कार का मार्ग अपना लिया था। 4. संथाल विद्रोह के दमन के बाद ब्रिटिश सरकार ने संथाल परगना क्षेत्र की विशेष प्रशासनिक व्यवस्था को मान्यता देते हुए 1855 में 'संथाल परगना टेनेंसी एक्ट' (SPTA) पारित किया था, जिसके तहत आदिवासियों की भूमि के हस्तांतरण को प्रतिबंधित कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? मौर्य कालीन प्रशासनिक व्यवस्था, प्रांतीय शासन और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य साम्राज्य में प्रांतों (चक्र) का प्रशासन सम्राट द्वारा नियुक्त कुमार या आर्यपुत्र नामक राजवंश के राजकुमारों द्वारा चलाया जाता था, तथा प्रांतों को आगे 'विषय' (जिला) में विभाजित किया गया था जिसका प्रमुख 'विषयपति' होता था। 2. अर्थशास्त्र के अनुसार, केंद्रीय प्रशासन में 'सन्निधाता' राजकीय कोष (राजकोष) का मुख्य संरक्षक था, जबकि 'समाहर्त्ता' साम्राज्य भर में करों के संग्रह, आय-व्यय के विवरण और वार्षिक बजट तैयार करने के लिए उत्तरदायी सर्वोच्च राजस्व अधिकारी था। 3. मौर्य काल में 'पण' (Pan) एक प्रकार का प्रमुख चांदी का सिक्का था, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर व्यापारिक लेन-देन और सरकारी कर्मचारियों को नकद वेतन देने के लिए किया जाता था, और इस काल में तांबे के सिक्के को 'माषक' कहा जाता था। 4. अशोक के शिलालेखों और यूनानी विवरणों से ज्ञात होता है कि मौर्य प्रशासन में 'रज्जुक' और 'प्रादेशिक' नामक अधिकारी केवल न्याय कार्य से जुड़े थे और उनका राजस्व संग्रह से कोई संबंध नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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