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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) के प्रावधानों और लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में विश्व स्तरीय अवसंरचना का विकास करना और वर्ष 2020 से 2025 के दौरान सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है, तथा इसके तहत कुल अनुमानित पूंजीगत व्यय का वित्तपोषण पूरी तरह से केवल केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना अनिवार्य किया गया है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी का कोई प्रावधान नहीं है।
  2. 2. इस पाइपलाइन के अंतर्गत ऊर्जा, सड़क, रेलवे, शहरी विकास और सिंचाई जैसे सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों को शामिल किया गया है, तथा इसमें परियोजना की तैयारी, पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ाने के लिए 'प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप' (PMG) पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
  3. 3. 'तस्सुई समिति' (Atanu Chakraborty Task Force), जिसकी सिफारिशों के आधार पर NIP का गठन किया गया था, ने यह संस्तुति की थी कि अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण के जोखिम को कम करने के लिए बॉंड बाजारों का विकास किया जाए और परिसंपत्तिमुद्रीकरण (Asset Monetization) को बढ़ावा दिया जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के तहत वित्तपोषण केवल सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र (PPP मॉडल सहित) की भागीदारी का प्रावधान है। NIP में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा अनुमानित है। कथन 2 सत्य है क्योंकि NIP ऊर्जा, सड़क, रेलवे, शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे विभिन्न क्षेत्रों को कवर करता है और पारदर्शिता के लिए PMG पोर्टल का उपयोग किया जाता है। कथन 3 सत्य है क्योंकि अतानु चक्रवर्ती कार्य बल (Atanu Chakraborty Task Force) की रिपोर्ट के आधार पर ही NIP की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसमें वित्तपोषण के लिए बॉन्ड बाजारों को गहरा करने और परिसंपत्तिमुद्रीकरण (Asset Monetization) पर जोर दिया गया था।
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