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Indian Polity
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राष्ट्रपति का त्यागपत्र?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपराष्ट्रपति को।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, गठन तथा उनकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उसका उत्सादन (Abolition) कर सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे, और इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 171 के अंतर्गत किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, हालांकि अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम से पहले वहाँ इसके कम सदस्य भी रहे थे।
3. विधान परिषद के कुल सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्यों का निर्वाचन स्थानीय निकायों (जैसे- नगरपालिका, जिला बोर्ड) के निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, एक-तिहाई सदस्यों का निर्वाचन विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने से भिन्न व्यक्तियों में से किया जाता है, और एक-बारहवें सदस्यों का निर्वाचन ऐसे स्नातकों (Graduates) द्वारा किया जाता है जो कम से कम तीन वर्ष पूर्व उस राज्य के क्षेत्र के भीतर किसी विश्वविद्यालय से स्नातक हो चुके हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही होगी जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
2. वर्ष 1993 में टी.एन. शेषन वाद के पश्चात संसद द्वारा निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थायी रूप से वैधानिक मान्यता दी गई, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया और यह प्रावधान किया गया कि आयोग के भीतर किसी भी निर्णय पर मतभेद होने की स्थिति में बहुमत का नियम लागू होगा, जहाँ मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास कोई वीटो पावर नहीं होगी।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में किए गए संशोधनों के अनुसार, किसी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार की समाप्ति की समयावधि मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय से ठीक अड़तालीस घंटे पूर्व निर्धारित की गई है, और इस मौन अवधि (Silence Period) के दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार या जनसभाओं के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों, उनके स्वतंत्र कामकाज और विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसके लिए यह अनिवार्य है कि वह उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखता हो, और उसे भारत सरकार के विधि मामलों में सलाह देने के साथ-साथ देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है, किंतु वह भारत सरकार का पूर्णकालिक सरकारी सेवक नहीं होता है।
2. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उसकी संयुक्त बैठक में तथा संसद की किसी भी समिति में, जिसका उसे सदस्य बनाया जाए, बोलने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 88 के तहत उसे संसद की किसी भी कार्यवाही में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद भारतीय शासन प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है, और CAG भारत की संचित निधि तथा प्रत्येक राज्य व संघ राज्य क्षेत्र (जहाँ विधानसभा हो) की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है, तथा अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्ट सीधे राष्ट्रपति और राज्यपालों के माध्यम से संसद और राज्य विधानमंडलों के समक्ष रखवाता है।
4. CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, और अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सीएजी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद को धारण करने के लिए पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में प्रयुक्त शब्दावली, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है, और यह अवधारणा ब्रिटिश राजशाही प्रणाली के विपरीत अमेरिकी संविधान से प्रेरित है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'गोलकनाथ वाद' (1967) में यह अभिनिर्धारित किया गया था कि प्रस्तावना संविधान की मूल आत्मा है और संसद को अनुच्छेद 368 के तहत भी प्रस्तावना में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि यह संविधान का एक अनन्य भाग है जिसमें कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
3. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के विचार को बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाई जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस संशोधन द्वारा संविधान में 'भाग IX-क' जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगरपालिकाओं के क्षेत्राधिकार के लिए 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
2. अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल को यह शक्ति दी गई है कि वह किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रदत्त या प्रदान की जाने वाली सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उस नगरीय क्षेत्र को नगरपालिका क्षेत्र घोषित करने से छूट दे सकता है और वहाँ 'औद्योगिक नगरी' (Industrial Township) स्थापित कर सकता है।
3. अनुच्छेद 243-S के तहत प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन किया जाना आवश्यक है, और यह प्रावधान उन सभी राज्यों पर अनिवार्य रूप से लागू होता है जिनकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, तथा इसमें राज्य के विधानमंडल की कोई विवेककारी शक्ति नहीं है।
4. अनुच्छेद 243-W के अनुसार राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों से संबंधित योजनाओं को तैयार करने और उनका क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं को सौंपी जा सकती है।
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