त्वरित लिंक्स
Civil services
1 views
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, महासागरीय धाराओं (Ocean Currents) को प्रभावित करने वाले कारकों और 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) जैसी प्रमुख धाराओं की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति और उनकी दिशा मुख्य रूप से प्रचलित हवाओं (Prevailing Winds), पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न कोरिओलिस बल (Coriolis Force), महाद्वीपीय तटरेखाओं के अवरोध तथा जल के घनत्व (Density) में भिन्नता से निर्धारित होती है।
- 2. उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' एक ठंडी जलधारा है, जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होकर उत्तर की ओर बहती है और ब्रिटिश द्वीपों के पश्चिमी तट तक पहुँचकर वहाँ के तापमान को अत्यधिक ठंडा कर देती है।
- 3. पृथ्वी के घूर्णन के कारण कोरिओलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्ध में अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: महासागरीय धाराओं के संचलन को मुख्य रूप से प्राथमिक पवन प्रणालियों (जैसे व्यापारिक पवनें और पछुआ पवनें), कोरिओलिस बल, महाद्वीपीय तटों की अवस्थिति और जल के तापमान व लवणता के अंतर से उत्पन्न घनत्व भिन्नता द्वारा नियंत्रित किया जाता है। कथन 2 गलत है: 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक गर्म जलधारा (Warm Current) है, न कि ठंडी जलधारा। यह मैक्सिको की खाड़ी से निकलकर उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित होती है और पश्चिमी यूरोप (विशेषकर ब्रिटिश द्वीपों) के जलवायु को अपेक्षाकृत गर्म और रहने योग्य बनाए रखती है। कथन 3 सही है: फेरेल के नियम और कोरिओलिस बल के प्रभाव के अनुसार, महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में या क्लॉकवाइज) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (घड़ी की सुई के विपरीत या एंटी-क्लॉकवाइज) विक्षेपित होती हैं। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
Related Questions
→
अप्रैल 2026 में जारी IMF की 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की कौन सी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है?
→
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'प्राथमिक तरंगें' (P-Waves) ध्वनि तरंगों की तरह अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल माध्यम में इनकी गति कम हो जाती है।
2. 'द्वितीयक तरंगें' (S-Waves) प्रकाश तरंगों की तरह अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो केवल ठोस माध्यम से ही गमन कर सकती हैं और तरल या गैसीय माध्यम में पूरी तरह लुप्त हो जाती हैं, जिसका उपयोग वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के बाहरी कोर (Outer Core) के तरल होने का पता लगाने में किया है।
3. 'धरातलीय तरंगें' (Surface Waves या L-Waves) पृथ्वी के भीतर गहराई में गमन करती हैं और सबसे पहले भूकंप मापी यंत्र (Seismograph) पर दर्ज की जाती हैं, तथा ये किसी भी भूकंप के दौरान सबसे कम विनाशकारी होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
GI Tag प्राप्त करने वाला हरियाणा का पहला फल कौन-सा बना है?
→
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उनके जलवायु तथा पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराएँ पृथ्वी की सतह पर ऊष्मा के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिसके तहत विषुवत वृत्त (Equator) से उष्ण जल को ध्रुवों की ओर और ध्रुवों से ठंडे जल को विषुवतीय क्षेत्रों की ओर प्रवाहित किया जाता है, और इस प्रक्रिया में पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाला कोरियोलिस बल (Coriolis Force) उत्तरी गोलार्ध में धाराओं को दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है।
2. उत्तरी अटलांटिक प्रवाह (North Atlantic Drift) के प्रभाव से पश्चिमी यूरोप के उत्तरी तटों के बंदरगाह उच्च अक्षांशों पर स्थित होने के बावजूद वर्षभर जमे नहीं रहते और खुले रहते हैं, जबकि इसके विपरीत दक्षिणी गोलार्ध में पेरू (हम्बोल्ट) धारा के प्रभाव से दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर शुष्क परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जो अटाकामा मरुस्थल के निर्माण में सहायक हैं।
3. एल निनो (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के पास) में वायुमंडलीय दाब में वृद्धि और पूर्वी भाग (पेरू के तट के पास) में दाब में कमी आती है, जिससे गर्म जल का प्रवाह दक्षिण अमेरिका के तट की ओर होने लगता है, जो भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वर्षा को अत्यधिक मजबूत करता है और बाढ़ जैसी स्थितियाँ उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा 'संशोधनों' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. वर्मा समिति (1999) ने अपने प्रतिवेदन में कुछ महत्वपूर्ण मूल कर्तव्यों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की पहचान की थी, जैसे कि 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम' (1971) और 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' (1972), जो यह सुनिश्चित करते हैं कि देश में नागरिकों द्वारा कुछ विशेष कर्तव्यों का पालन विधायी माध्यमों से भी अनिवार्य रूप से किया जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.