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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' तथा विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
- 2. अनुच्छेद 250 के तहत, यदि देश में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा प्रवर्तन में है, तो संसद को राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और ऐसे बनाए गए कानून आपातकाल की समाप्ति के पश्चात ठीक छह महीने की अवधि समाप्त होने पर निष्प्रभावी हो जाते हैं।
- 3. अनुच्छेद 253 के अनुसार, संसद को भारत के संपूर्ण क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कोई भी कानून बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, जो किसी अंतरराष्ट्रीय संधि (International Treaty), करार या अभिसमय (Convention) के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हो, भले ही वह विषय राज्य सूची के अंतर्गत ही क्यों न आता हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 249 के अनुसार, राज्य सभा द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित संकल्प के आधार पर संसद को राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है, तथा ऐसा संकल्प अधिकतम **एक वर्ष** (One year) की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, न कि दो वर्ष के लिए। इसे आवश्यकतानुसार बार-बार एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 250 के अनुसार, राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवर्तन में रहने के दौरान संसद को राज्य सूची के विषयों पर विधि बनाने की शक्ति प्राप्त होती है। इस प्रकार बनाए गए कानून आपातकाल की समाप्ति के पश्चात **छह महीने** की अवधि समाप्त होने पर उन विषयों के संबंध में निष्प्रभावी हो जाते हैं जिन तक संसद की शक्ति का विस्तार आपातकाल के कारण होता है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 253 संसद को यह शक्ति देता है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि, समझौते या सम्मेलन (Treaty, Agreement, or Convention) को लागू करने के लिए भारत के संपूर्ण क्षेत्र या उसके किसी हिस्से के वास्ते कोई भी कानून बना सकती है, भले ही वह विषय राज्य सूची (State List) में ही क्यों न सूचिबद्घ हो।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14 से 18) तथा विधियों के समक्ष समानता एवं विधियों के समान संरक्षण के सिद्धांतों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'विधियों के समक्ष समानता' (Equality before the law) का विचार ब्रिटिश मूल की अवधारणा से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति के पक्ष में विशेष विशेषाधिकारों का अभाव तथा देश के सामान्य कानून के प्रति सभी व्यक्तियों की समान अधीनता, चाहे वह साधारण नागरिक हो या कोई उच्च पदाधिकारी।
2. 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal protection of the laws) की अवधारणा अमेरिकी संविधान से ली गई है, जिसका तात्पर्य समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के बीच समान व्यवहार तथा विधि के अनुप्रयोग में समानों और असमानों के बीच उचित वर्गीकरण (Reasonable Classification) करना है।
3. अनुच्छेद 14 के अंतर्गत निहित समानता के सिद्धांत के अपवादस्वरूप, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा किए गए किसी भी कृत्य के लिए किसी भी न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही से पूर्ण और आजीवन उन्मुक्ति (Immunity) प्रदान करता है, यहाँ तक कि उनके निजी कृत्यों के संबंध में भी उन पर कोई सिविल मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment - EIA) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित NGT एक विशेष निकाय है जो पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के प्रभावी व त्वरित निपटान के लिए कार्य करता है, तथा इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।
2. NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले किसी भी पर्यावरण संबंधी आदेश, निर्णय या पुरस्कार से व्यथित व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध 90 दिनों के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता इस अधिनियम के तहत वर्जित है।
3. पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) भारत में पहली बार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विधיक रूप से वर्ष 1994 में अधिसूचित किया गया था, और इसके तहत किसी भी नई विकास परियोजना के निर्माण से पहले उसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 371' और उसके विभिन्न उप-अनुच्छेदों के तहत राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम और सिक्किम आदि) के लिए विशेष प्रावधानों और क्षेत्रीय स्वायत्तता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XXI (अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध) के अंतर्गत अनुच्छेद 371A नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान करता है, जिसके तहत संसद का कोई भी अधिनियम जो नागालैंड के धार्मिक या सामाजिक प्रथागत कानूनों, रूढ़िगत न्याय और भूमि के स्वामित्व या हस्तांतरण से संबंधित हो, तब तक राज्य में लागू नहीं होगा जब तक कि नागालैंड की विधान सभा एक संकल्प द्वारा इसे अनुमोदित नहीं कर देती।
2. अनुच्छेद 371F सिक्किम राज्य से संबंधित विशेष प्रावधान प्रदान करता है, जिसके तहत सिक्किम के भारत में विलय के पश्चात वहाँ के मूल निवासियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल को विशेष उत्तरदायित्व सौंपा गया है, तथा संसद द्वारा अधिनियमित कोई भी केंद्रीय कानून सिक्किम में स्वतः लागू नहीं होता जब तक कि राष्ट्रपति द्वारा विशेष आदेश न दिया जाए।
3. अनुच्छेद 371D और 371E आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक रोजगार के मामलों में स्थानीय लोगों के लिए विशेष अवसरों और समान सुविधाओं के प्रावधान से संबंधित हैं, जिन्हें संसद द्वारा विधि बनाकर और राष्ट्रपति के आदेश से लागू किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराएँ महासागरों में जल का एक निश्चित दिशा में विशाल पैमाने पर निरंतर प्रवाह है, और पृथ्वी का घूर्णन (Coriolis Force) उत्तरी गोलार्ध में इन धाराओं को दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है।
2. व्यापारिक हवाएँ (Trade Winds) और पछुआ हवाएँ (Westerlies) महासागरीय सतह पर चलने वाली प्रमुख प्रचलित पवनें हैं, जो सतही धाराओं की दिशा और गति को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
3. महासागरीय जल की लवणता (Salinity) और घनत्व में अंतर भी धाराओं के उद्भव को प्रभावित करते हैं; अधिक घनत्व और उच्च लवणता वाला ठंडा जल नीचे बैठ जाता है और कम घनत्व वाले गर्म जल की ओर प्रवाहित होता है, जिससे ऊर्ध्वाधर (Vertical) जल संचलन उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर की जा सकती है, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे बाद में '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
2. राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जा सकती है जब संघ के मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा—जिसमें प्रधानमंत्री और कैबिनेट स्तर के अन्य मंत्री शामिल हैं—इस आशय का लिखित निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, और यह पूर्व-लिखित संसूचन संविधान में अनिवार्य किया गया है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा का संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'एक महीने' के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदन किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा यह आपातकाल स्वतः समाप्त हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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