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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' को भारत द्वारा जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity - CBD, 1992) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अधिनियमित किया गया था, तथा यह अधिनियम देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके उपयोग से होने वाले लाभों के न्यायसंगत और निष्पक्ष बँटवारे के साथ-साथ आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच को विनियमित करने का प्रावधान करता है।
- 2. 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) एक वैधानिक और स्वायत्त निकाय है, जिसकी स्थापना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में की गई है, और यह देश के भीतर किसी भी व्यक्ति द्वारा जैव संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग या जैव-सर्वेक्षण करने के लिए पूर्व अनुमति प्रदान करने वाला एकमात्र सर्वोच्च प्राधिकारी है।
- 3. अधिनियम के तहत त्रि-स्तरीय संस्थागत तंत्र का प्रावधान किया गया है—राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB), और स्थानीय स्तर पर पंचायत तथा नगर निकायों के स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMC), जिनमें से प्रत्येक समिति को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले जैविक संसाधनों के विवरण और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने के लिए 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (People's Biodiversity Register - PBR) तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' को भारत द्वारा रियो डी जेनेरियो में आयोजित जैव विविधता अभिसमय (CBD, 1992) के अनुपालन में अधिनियमित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, उसके घटकों का सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का निष्पक्ष एवं न्यायसंगत बँटवारा करना है।
कथन 2 असत्य है: यद्यपि 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) चेन्नई स्थित एक वैधानिक और स्वायत्त निकाय है, किंतु यह देश में जैव संसाधनों के उपयोग के लिए अनुमति देने वाला 'एकमात्र' सर्वोच्च प्राधिकारी नहीं है। अधिनियम के तहत त्रि-स्तरीय व्यवस्था है, जहाँ राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMC) भी विशिष्ट गतिविधियों (जैसे स्थानीय स्तर पर नागरिकों या किसानों द्वारा संसाधनों के उपयोग) के संबंध में परामर्श या विनियमन का अधिकार रखती हैं, तथा विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के लिए NBA की अनुमति अनिवार्य होती है, लेकिन सभी मामलों में वह अकेली संस्था नहीं है।
कथन 3 सही है: जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत त्रि-स्तरीय संरचना का प्रावधान किया गया है: (i) राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), (ii) राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB), और (iii) स्थानीय स्तर पर स्थानीय निकायों के अंतर्गत 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (Biodiversity Management Committees - BMCs)। इन BMCs को स्थानीय लोगों के सहयोग से 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करने का वैधानिक उत्तरदायित्व सौंपा गया है, जिसमें स्थानीय जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का पूरा विवरण दर्ज होता है।
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य संगठनों और राजस्व सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में 'दीवान-ए-कोही' (Diwan-i-Kohi) विभाग की स्थापना सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि का विकास करना, बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना और किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता (तकावी ऋण) प्रदान करना था।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की प्रथा की शुरुआत की थी और घोड़ों को दागने (दाग प्रणाली) तथा सैनिकों के हुलिया का विवरण दर्ज करने की कठोर व्यवस्था लागू की थी, ताकि भ्रष्टाचार को रोका जा सके।
3. सल्तनत काल में 'बरीद-ए-मुमालिक' (Barid-i-Mumalik) राज्य का मुख्य काजी (न्याय विभाग का प्रमुख) होता था, जो न्याय प्रशासन के साथ-साथ उलेमा वर्ग के धार्मिक मामलों का भी सर्वोच्च निरीक्षण करता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329-A) के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) और चुनावी सुधारों से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 324 देश में संसद, राज्य legislatures (विधानमंडलों), राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग में निहित करता है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार ठीक उसी प्रकार के होते हैं जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के होते हैं।
2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के अंतर्गत 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practice) की परिभाषा में केवल उन्हीं कृतियों को शामिल किया जाता है जो सीधे तौर पर मतदाताओं को रिश्वत देने या डराने-धमकाने से संबंधित होते हैं, जबकि किसी उम्मीदवार द्वारा अपने धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना या शत्रुता की भावना को बढ़ावा देना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता है।
3. 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया' द्वारा ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए जब तक संसद इस संबंध में कोई कानून नहीं बनाती, तब तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश) की एक उच्च-स्तरीय चयन समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति की जानी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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मिजोरम विश्वविद्यालय के Natural History Museum को Biological Diversity Act के तहत भारत का कौन-सा मान्यता प्राप्त Repository घोषित किया गया है?
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