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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट' (Global Gender Gap Report) और इसके विभिन्न आयामों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट' प्रतिवर्ष विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum - WEF) द्वारा प्रकाशित की जाती है, जो चार प्रमुख स्तंभों—आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक प्राप्ति, स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता, और राजनीतिक सशक्तिकरण—के आधार पर देशों में लैंगिक असमानता के स्तर का मूल्यांकन करती है।
  2. 2. इस सूचकांक में 'स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता' उप-सूचकांक के अंतर्गत जन्म के समय लिंग अनुपात (Sex Ratio at Birth) और स्वस्थ जीवन प्रत्याशा (Healthy Life Expectancy) जैसे संकेतकों को शामिल किया जाता है, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के जैविक रूप से निर्धारित संभावित अंतरों का कठोरता से मानकीकरण किया जाता है।
  3. 3. वर्ष 2024 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक सशक्तिकरण और शैक्षिक प्राप्ति के क्षेत्रों में लगातार उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है, जिसके फलस्वरूप भारत वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक के शीर्ष 50 देशों की सूची में शामिल हो गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट' विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा प्रतिवर्ष जारी की जाती है। यह रिपोर्ट चार प्रमुख स्तंभों (Economic Participation and Opportunity, Educational Attainment, Health and Survival, तथा Political Empowerment) पर आधारित होती है। कथन 2 सही है: 'स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता' (Health and Survival) उप-सूचकांक के अंतर्गत जन्म के समय लिंग अनुपात और स्वस्थ जीवन प्रत्याशा जैसे संकेतकों का उपयोग किया जाता है, और इसमें महिलाओं व पुरुषों की जैविक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को ध्यान में रखा जाता है। कथन 3 गलत है: यद्यपि भारत ने राजनीतिक सशक्तिकरण और कुछ अन्य संकेतकों में सुधार दिखाया है, तथापि भारत वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में शामिल नहीं है, बल्कि इसकी रैंकिंग अपेक्षाकृत काफी पीछे (लगभग 129वीं रैंक, 2024 के अनुसार) है। अतः कथन 3 असत्य है।
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