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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) और लोक सेवाओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के समान एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का उपबंध कर सकती है, तथा यह शक्ति भारतीय न्यायिक सेवा के सृजन तक भी विस्तारित है।
  2. 2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु वे केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन सेवा करते हैं, और उन्हें संघ तथा संबंधित राज्य दोनों की लोक सेवा के संयुक्त नियंत्रण के तहत रखा जाता है, जिससे वे दोनों सत्ताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं।
  3. 3. अनुच्छेद 315 के तहत संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया है, किंतु दो या अधिक राज्य समझौते के माध्यम से यह अनुरोध कर सकते हैं कि संसद विधि द्वारा उनके लिए एक संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) का गठन करे, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्यों के राज्यपालों द्वारा संयुक्त रूप से की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 के अंतर्गत, यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक प्रस्ताव (संकल्प) पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) के अतिरिक्त किसी भी नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन कर सकती है। इसमें संविधान संशोधन (42वें संशोधन, 1976) के माध्यम से 'भारतीय न्यायिक सेवा' (All India Judicial Service) के सृजन का प्रावधान भी जोड़ा गया था। कथन 2 गलत है: अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उन्हें विशिष्ट राज्यों (कैडर) में आवंटित किया जाता है, किंतु वे भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों के अधीन कार्य करते हुए केंद्र-राज्य के साझा प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा होते हैं। हालांकि, उन्हें किसी एक विशेष सरकार के प्रति दोहरे नियंत्रण के अधीन नहीं रखा जाता, बल्कि उनका प्रशासनिक नियंत्रण उस राज्य सरकार के पास होता है जहाँ वे तैनात होते हैं, जबकि अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई (बर्खास्तगी आदि) का अधिकार केवल राष्ट्रपति (केंद्र सरकार) के पास होता है, न कि दोनों के संयुक्त नियंत्रण में। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 315 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का प्रावधान है। दो या अधिक राज्य यदि यह चाहते हैं कि उनके लिए एक 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JPSC) का गठन किया जाए, तो संबंधित राज्यों के विधानमंडल इस आशय का प्रस्ताव पारित कर सकते हैं, जिसके बाद **संसद** विधि द्वारा संयुक्त लोक सेवा आयोग का सृजन कर सकती है (इसके लिए राज्यों का समझौता या अनुरोध पर्याप्त नहीं है, बल्कि संसद का कानून आवश्यक है)। इसके अलावा, JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति **राष्ट्रपति** द्वारा की जाती है, न कि राज्यों के राज्यपालों द्वारा।
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