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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग X' के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों (Scheduled and Tribal Areas) के प्रशासन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर किसी भी राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है, तथा किसी क्षेत्र को 'अनुसूचित क्षेत्र' घोषित करने की शक्ति केवल और केवल संसद में निहित है।
- 2. पाँचवीं अनुसूची के तहत प्रत्येक ऐसे राज्य में, जिसमें अनुसूचित क्षेत्र हैं, एक 'जनजाति सलाहकार परिषद' (Tribal Advisory Council - TAC) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिसमें अधिकतम 20 सदस्य होते हैं, जिनमें से तीन-चौथाई सदस्य राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होने चाहिए।
- 3. संविधान की छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के लिए स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous District Councils - ADCs) के गठन का प्रावधान करती है, तथा इन परिषदों को अपने संबंधित क्षेत्रों के भीतर भूमि, वनों, कृषि और सामाजिक प्रथाओं से जुड़े मामलों पर कानून बनाने की विधायी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान की पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से अलग राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। हालाँकि, किसी क्षेत्र को 'अनुसूचित क्षेत्र' (Scheduled Area) घोषित करने, उसका विस्तार करने या उसकी सीमा बदलने की शक्ति भारत के **राष्ट्रपति** में निहित होती है, न कि संसद में। राष्ट्रपति किसी राज्य के राज्यपाल के परामर्श से ऐसा आदेश जारी कर सकते हैं।
कथन 2 सही है: पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राज्य में जहाँ अनुसूचित क्षेत्र मौजूद हैं, एक 'जनजाति सलाहकार परिषद' (TAC) का गठन किया जाना अनिवार्य है। इसमें सामान्यतः 20 से अधिक सदस्य नहीं होते हैं, और इनमें से तीन-चौथाई (75%) सदस्य राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होने चाहिए।
कथन 3 सही है: संविधान की छठी अनुसूची विशेष रूप से पूर्वोत्तर के चार राज्यों—असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम—के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के लिए 'स्वायत्त जिला परिषदों' (ADCs) और क्षेत्रीय परिषदों के गठन का अधिकार देती है। इन परिषदों के पास भूमि, वन, जल उपयोग, कृषि, और विवाह या सामाजिक रीति-रिवाजों जैसे विशिष्ट विषयों पर कानून बनाने की विधायी शक्ति होती है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 312' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के सृजन और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ और राज्यों के लिए संयुक्त रूप से एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा शामिल हैं) का सृजन कर सके, बशर्ते कि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है।
2. भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service - IFS) को वर्ष 1966 में 'अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951' के तहत संसद द्वारा एक नई अखिल भारतीय सेवा के रूप में सृजित किया गया था, और वर्तमान में संविधान के तहत कुल चार (4) अखिल भारतीय सेवाएं अस्तित्व में हैं।
3. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की सेवा की शर्तें और उनके वेतन-भत्ते आदि संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, किंतु इन सेवाओं के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण (Disciplinary Control) और अंतिम दंडात्मक कार्रवाई करने की शक्ति केवल संबंधित राज्य सरकारों के पास होती है, केंद्र सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329) के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India - ECI) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक स्थायी निकाय है जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्तों, यदि कोई हों, से मिलकर बनेगा, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, तथा मूल संविधान में निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) के रूप में ही स्थापित किया गया था।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग के पास संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति है, किंतु संविधान या किसी कानून के तहत किए गए चुनावों से संबंधित विवादों का न्यायनिर्णयन (Adjudication) करने की शक्ति केवल निर्वाचन आयोग के पास ही होती है, और इस पर न्यायालयों के हस्तक्षेप का पूर्ण प्रतिषेध है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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अशोक के 'कलिंग विजय' का उल्लेख किस शिलालेख में मिलता है?
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