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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, महासागरीय धाराओं (Ocean Currents) और उनके निर्माण तथा प्रभाव से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय धाराओं के निर्माण के लिए प्राथमिक रूप से पृथ्वी का घूर्णन (Coriolis force), वायुदाब और पवनें, तथा महासागरीय जल के तापमान और लवणता में भिन्नता उत्तरदायी होती हैं, किंतु चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल इन धाराओं की दिशा और गति को निर्धारित करने वाला सबसे प्रमुख बल माना जाता है।
  2. 2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिओलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जिसके कारण महासागरों के मध्य अक्षांशों में प्रति-चक्रवातीय (Anticyclonic) वृत्ताकार धाराएँ (Gyres) बनती हैं।
  3. 3. विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र (Fishing Grounds) प्रायः वहाँ विकसित होते हैं जहाँ ठंडी और गर्म महासागरीय धाराएँ आपस में मिलती हैं, क्योंकि यह मिलन क्षेत्र प्लवक (Plankton) के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है, जो मछलियों का मुख्य आहार है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि महासागरीय धाराओं के निर्माण में प्रचलित पवनें, तापमान, लवणता, घनत्व और कोरिओलिस बल प्राथमिक कारक हैं। चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल मुख्य रूप से ज्वार-भाटे (Tides) उत्पन्न करता है, न कि महासागरीय धाराओं को सीधे नियंत्रित करने वाला प्रमुख बल। कथन 2 सत्य है; कोरिओलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्ध में धाराएँ दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ती हैं जिससे महासागरीय ग्याइर्स (Gyres) बनते हैं। कथन 3 सत्य है; ठंडी और गर्म धाराओं के मिलने वाले क्षेत्र (जैसे न्यूफाउंडलैंड के पास ग्रैंड बैंक और जापान के पास डोगर बैंक) प्लवक के विकास के लिए आदर्श होते हैं, जिससे ये स्थान दुनिया के सबसे बड़े मत्स्य क्षेत्र बन जाते हैं।
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