त्वरित लिंक्स
Indian Polity
28 views
अनुच्छेद 32 को आत्मा किसने कहा?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अंबेडकर।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली 'रिट्स' (Writs) की शक्तियों और उनके अनुप्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अवैध नजरबंदी से मुक्त कराना है, और यह रिट केवल किसी सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) के विरुद्ध ही जारी की जा सकती है, निजी व्यक्तियों के विरुद्ध नहीं।
2. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) की रिट किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जारी की जाती है जो किसी लोक पद पर अवैध रूप से आसीन हुआ है, और इस रिट को दायर करने के लिए याचिकाकर्ता का उस पद से सीधे प्रभावित होना या aggrieved होना अनिवार्य नहीं है, इसे कोई भी तीसरा व्यक्ति भी अदालत में ला सकता है।
3. उत्प्रेषण (Certiorari) और प्रतिषेध (Prohibition) दोनों ही रिट्स केवल न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, और इन्हें किसी भी प्रशासनिक प्राधिकारी (Administrative Authority) के खिलाफ जारी नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधाई संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोक हित में एक अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच करना, उन पर बहस करना तथा ऐसे विषयों से संबंधित सुझाव देना है जिन पर राज्यों या केंद्र और राज्यों के समान हित हों।
2. सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिश के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा स्थापित अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है, जिसके अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं तथा इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक शामिल होते हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और यह प्रस्ताव अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
→
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 के विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 6 उन व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकारों से संबंधित है जो पाकिस्तान से भारत को प्रव्रज्या (Migration) करके आए हैं, और इसके तहत यदि ऐसा व्यक्ति 1 जुलाई 1948 के पश्चात भारत आया है, तो उसे भारत का नागरिक बनने के लिए निर्धारित प्रपत्र में पंजीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन करना अनिवार्य था, बशर्ते वह आवेदन से ठीक पहले कम से कम छह मास तक भारत में साधारणतया निवासी रहा हो।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 के अंतर्गत 'पंजीकरण द्वारा' (By Registration) नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि भारतीय मूल का व्यक्ति (PIO) जो अविभाजित भारत से बाहर किसी देश में सामान्य रूप से निवास कर रहा है, उसे आवेदन करने से पूर्व भारत में लगातार 7 वर्षों तक निवास करना होगा।
3. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता 'वंचना द्वारा' (By Deprivation) समाप्त कर दी जाती है, जिसकी औपचारिक घोषणा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य की कार्यपालिका के अंतर्गत राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री के संवैधानिक उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम का होता है, किंतु यदि राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग राज्य सूची के किसी ऐसे विषय पर करता है जिस पर कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक थी, तो राज्यपाल ऐसा अध्यादेश राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना प्रख्यापित नहीं कर सकता है।
2. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति मृत्युदंड के मामलों में भी राज्यपाल को राष्ट्रपति के समान अनन्य रूप से पूर्णतः प्राप्त होती है।
3. अनुच्छेद 167 के प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासनिक मामलों और विधान विषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, किंतु राज्यपाल द्वारा माँगे जाने पर भी वह मंत्रिपरिषद द्वारा अभी तक विचार न किए गए किसी पृथक् मंत्री के व्यक्तिगत विनिश्चय को परिषद के समक्ष रखने से मना कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 317 के उपबंधों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही उसके पद से हटाया जा सकता है, और इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति द्वारा मामले को उच्चतम न्यायालय को जाँच के लिए भेजा जाना अनिवार्य है, तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 319 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी अन्य रोजगार के लिए पात्र नहीं होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के पात्र होते हैं, किंतु वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के पात्र नहीं होते हैं।
3. अनुच्छेद 322 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के व्यय, जिसमें आयोग के सदस्यों या कर्मचारियों को देय या उनके संबंध में कोई वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, भारत की संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) होते हैं, और इन पर संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.