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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1920-1922 के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) और इसके दौरान हुई महत्वपूर्ण घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के असहयोग कार्यक्रम को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया, तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस के संगठन में क्रांतिकारी परिवर्तन करते हुए प्रादेशिक कांग्रेस समितियों का गठन भाषाई आधार पर (Linguistic basis) करने का निर्णय लिया गया।
  2. 2. असहयोग आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों और मजदूरों के आंदोलन भी राष्ट्रीय धारा के साथ जुड़ गए, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में 'एका आंदोलन' (Eka Movement) और असम में चाय बागान के मजदूरों की प्रसिद्ध 'हड़ताल' जैसी घटनाएं मुख्य रूप से इसी अवधि में सामने आईं।
  3. 3. महात्मा गांधी ने फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर) में हुई हिंसक घटना के कारण असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया, जिसके तुरंत बाद देश की गिरती लोकप्रियता को देखते हुए खिलाफत आंदोलन के नेताओं (अली बंधुओं) ने गांधी जी का पूर्ण समर्थन करने से इंकार करते हुए कांग्रेस से स्थायी रूप से नाता तोड़ लिया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: दिसंबर 1920 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में असहयोग के प्रस्ताव की पुष्टि की गई। इसी अधिवेशन में कांग्रेस संगठन में व्यापक बदलाव किए गए और भाषाई आधार पर प्रादेशिक कांग्रेस समितियों (Provincial Congress Committees) के गठन को मंजूरी दी गई ताकि आम जनता तक पार्टी की पहुँच बढ़ाई जा सके। कथन 2 सही है: असहयोग आंदोलन के दौरान ग्रामीण और श्रमिक असंतोष भी खुलकर सामने आया। अवध में मदारी पासी के नेतृत्व में 'एका आंदोलन' (1921-22) और असम में चाय बागान के कूलियों (लेबर) का आंदोलन इसी कालखंड की महत्वपूर्ण विशेषताएं थीं। कथन 3 गलत है: चौरी-चौरा कांड (फरवरी 1922) के बाद गांधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया, जिससे देश में निराशा जरूर फैली, किंतु खिलाफत आंदोलन के मुख्य नेता अली बंधुओं (मोहम्मद अली और शौकत अली) ने उस समय तुरंत कांग्रेस से स्थायी नाता नहीं तोड़ा था, बल्कि असहयोग वापसी के बाद मतभेद बाद में उभरे (विशेषकर 1923 के बाद जब तुर्की में मुस्तफा कमाल पाशा द्वारा खिलाफत पद को ही समाप्त कर दिया गया)। अतः कथन 3 असत्य है।
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