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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - Articles 36-51) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और विधि बनाने में इन तत्त्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, तथा इन्हें देश के किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित (Justiciable) कराया जा सकता है।
  2. 2. अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो जिससे समुदाय के भौतिक संसाधनों का सम्यक् वितरण हो और धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में न हो, का प्रावधान किया गया है।
  3. 3. अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, जो कि एक वादयोग्य (Justiciable) अधिकार है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार, नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक अवश्य हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित (Non-justiciable) नहीं कराया जा सकता है। कथन 2 सत्य है: अनुच्छेद 39 के तहत राज्य अपने नीति का संचालन विशेष रूप से इस प्रकार करेगा कि सुनिश्चित रूप से समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो जिससे जनसाधारण के हित का सर्वोत्तम रूप से साधन हो और धन तथा उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में न हो। कथन 3 असत्य है: अनुच्छेद 44 के अंतर्गत 'समान नागरिक संहिता' (UCC) का प्रावधान जरूर किया गया है, किंतु यह नीति निर्देशक तत्वों (भाग IV) का हिस्सा होने के कारण 'अवादयोग्य' (Non-justiciable) है, न कि वादयोग्य।
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