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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - Supreme Court) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 124 के अंतर्गत भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा 'द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993)' के पश्चात स्थापित 'कॉलेजियम प्रणाली' के तहत मुख्य न्यायाधीश को सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के एक कोलेजियम की सलाह लेना अनिवार्य होता है।
- 2. अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांगता है, तो सर्वोच्च न्यायालय उस पर अपनी राय देने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य (Bound) है।
- 3. अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, किंतु स्वयं सर्वोच्च न्यायालय अपने ही पूर्ववर्ती निर्णयों या आदेशों से पूरी तरह बंधा नहीं होता है और वह न्यायिक समीक्षा के तहत उन्हें उलट सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वर्ष 1993 के दूसरे न्यायाधीश मामले (Second Judges Case) में उच्चतम न्यायालय ने 'कॉलेजियम प्रणाली' की शुरुआत की, जिसके अनुसार मुख्य न्यायाधीश को सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के कोलेजियम से परामर्श करना आवश्यक होता है। (वर्तमान में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को रद्द किए जाने के बाद यही प्रणाली लागू है)।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की दोहरी शक्ति प्राप्त है। यदि कोई ऐसा विधि या तथ्य का प्रश्न उत्पन्न होता है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है, और इस पहली श्रेणी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय राय देने के लिए 'बाध्य नहीं' है (यह न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है)। वहीं, यदि मामला ब्रिटिश काल की किसी संधि या समझौते से संबंधित हो, तो न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को राय देना अनिवार्य होता है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 141 के अनुसार भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून आबद्धकर (Binding) होता है। इसके साथ ही, 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) होने के नाते सर्वोच्च न्यायालय अपनी गलतियों को सुधारने के लिए अपने पूर्व के निर्णयों से बंधा नहीं होता है और वह आवश्यकतानुसार उन्हें संशोधित या उलट सकता है (जैसे केशवानंद भारती मामले में गोलकनाथ मामले के निर्णय को पलटा गया था)। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 105' (সংসद् के सदनों की, तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकारों आदि) के अंतर्गत संसद सदस्यों के संसदीय विशेषाधिकारों और 'संसदीय उन्मुक्ति' (Parliamentary Immunity) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105(2) के अनुसार, संसद में या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में संसद के किसी भी सदस्य के खिलाफ किसी भी न्यायालय में कोई भी कार्यवाही (चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक) नहीं चलाई जा सकती है।
2. 'पी.वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई (1998)' मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि यदि कोई सांसद संसद में किसी प्रस्ताव पर मतदान करने के लिए रिश्वत स्वीकार करता है, तो उसे अनुच्छेद 105(2) के तहत दी गई संसदीय उन्मुक्ति और आपराधिक अभियोजन से पूर्ण संरक्षण प्राप्त होगा।
3. 'झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) रिश्वतखोरी मामला (2024)' में उच्चतम न्यायालय की सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने पिछले 1998 के फैसले को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि रिश्वत लेने वाले सांसदों को अनुच्छेद 105 या अनुच्छेद 194 के तहत मिलने वाले संसदीय विशेषाधिकारों से कोई कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं होगा, और ऐसे मामलों में उन पर आपराधिक न्यायालयों द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51-क) तथा इससे संबंधित स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया, तथा वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था।
2. मूल प्रकृति से ये कर्तव्य 'अन्यायिक' (Non-justiciable) हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन या अनुपालन न किए जाने पर सीधे न्यायालय द्वारा कोई कानूनी दंड या प्रवर्तन का प्रावधान संविधान के इस भाग में स्वतः नहीं किया गया है, किंतु संसद विधि द्वारा इनके कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त दंड या प्रतिबंध का उपबंध कर सकती है।
3. मूल कर्तव्यों का यह प्रावधान केवल और केवल भारत के नागरिकों पर लागू होता है, और इसमें विदेशी नागरिकों (चाहे वे प्रवासी हों या शरणार्थी) के लिए किसी भी प्रकार के कर्तव्यों का उल्लेख नहीं किया गया है, ठीक उसी तरह जैसे संविधान के कुछ विशिष्ट मौलिक अधिकार (जैसे अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30) केवल नागरिकों के लिए ही उपलब्ध हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) और संसदीय कृत्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी है, और संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (जैसे 1, 2, 3 आदि) होगा, किंतु राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वह संसद की पूर्व अनुमति से संघ के किसी भी शासकीय प्रयोजन के लिए हिंदी भाषा के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को अधिकृत कर सकता है।
2. 'राजभाषा अधिनियम, 1963' (Official Languages Act, 1963) के प्रावधानों के तहत संविधान लागू होने के पंद्रह वर्ष की अवधि (यानी 26 जनवरी 1965) के बाद भी संघ के शासकीय कार्यों और संसद में पत्राचार के लिए अंग्रेजी भाषा के प्रयोग को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की अनुमति प्रदान की गई है।
3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और अनुच्छेद 351 के अंतर्गत केंद्र सरकार का यह कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति (Composite culture) के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - अनुच्छेद 352) के प्रावधानों और इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा का आधार 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) था, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को शामिल किया गया।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके जारी रहने की संपुष्टि के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित करना अनिवार्य है, और यह अनुमोदन उद्घोषणा की तिथि से दो माह के भीतर हो जाना चाहिए।
3. जब राष्ट्रीय आपातकाल प्रवर्तन में होता है, तब अनुच्छेद 358 के अंतर्गत स्वतः ही अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार निलंबित हो जाते हैं, और इसके साथ ही राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वह अनुच्छेद 359 के तहत आदेश जारी कर भाग III द्वारा प्रदत्त अन्य मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और उसके अधिकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान ही होते हैं।
2. निर्वाचन आयोग के अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से किसी भी समय हटाया जा सकता है, क्योंकि संविधान उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान विधिक सुरक्षा या महाभियोग जैसी प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 123 के अंतर्गत 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practices) की परिभाषा में केवल जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना ही शामिल है, और यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के निजी जीवन या उसके व्यक्तिगत चरित्र से जुड़े पहलुओं पर बयान देता है, तो वह इस धारा के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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