BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
15 views

भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, समुद्र विज्ञान (Oceanography) के अंतर्गत 'समुद्री धाराओं' (Ocean Currents) और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोरियोलिस बल (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराओं को उनकी मूल दिशा से दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, तथा भूमध्य रेखा पर यह बल अधिकतम होता है।
  2. 2. 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक प्रमुख उष्णकटिबंधीय गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर प्रवाहित होते हुए पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों की जलवायु को अपेक्षाकृत समशीतोष्ण और बर्फ-मुक्त रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  3. 3. 'लग्रेंजियन' (Lagrangian) और 'यूलरियन' (Eulerian) विधियाँ महासागरीय धाराओं के मापन और अध्ययन की दो प्रमुख तकनीकें हैं, जहाँ यूलरियन विधि में किसी निश्चित बिंदु पर जल के वेग और दिशा को मापा जाता है, जबकि लग्रेंजियन विधि में तैरते हुए उपकरणों या पिंडों के साथ प्रवाहित होकर उनका मार्ग ट्रैक किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि कोरियोलिस बल (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है और यह ध्रुवों पर अधिकतम तथा भूमध्य रेखा (Equator) पर शून्य होता है। भूमध्य रेखा पर कोरियोलिस बल का मान शून्य होने के कारण वहाँ महासागरीय धाराएँ सीधे इस बल से विक्षेपित नहीं होतीं। कथन 2 सही है; गल्फ स्ट्रीम एक शक्तिशाली गर्म जलधारा है जो मेक्सिको की खाड़ी से निकलकर उत्तरी अटलांटिक महासागर से होती हुई यूरोप के पश्चिमी तट तक पहुँचती है, जिससे वहाँ का तापमान उच्च अक्षांशों पर होने के बावजूद अपेक्षाकृत गर्म रहता है। कथन 3 सही है; महासागरीय धाराओं के अध्ययन के लिए 'यूलरियन' (Eulerian) और 'लग्रेंजियन' (Lagrangian) दोनों प्रमुख वैज्ञानिक तकनीकें हैं। यूलरियन पद्धति में एक निश्चित स्थिर स्थिति (Fixed point) पर करंट मीटर लगाकर प्रवाह मापा जाता है, जबकि लग्रेंजियन पद्धति में ड्रिफ्टर्स (Drifters) या फ्लोट्स का उपयोग किया जाता है जो जल के साथ गति करते हैं।
Share:

Related Questions

→ भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance), 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003' (FRBM Act) तथा राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. FRBM अधिनियम, 2003 का मुख्य उद्देश्य देश में वित्तीय अनुशासन को सुनिश्चित करना, राजस्व घाटे को समाप्त करना तथा दीर्घकालिक व्यापक आर्थिक स्थिरता प्राप्त करना था, जिसके तहत केंद्र सरकार के लिए वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटे की सीमा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3 प्रतिशत लक्षित की गई थी। 2. वर्ष 2018 में एन.के. सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर FRBM अधिनियम में संशोधन किया गया, जिसके तहत सरकार को यह कानूनी बाध्यता दी गई कि वह वर्ष 2020-21 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत और कुल ऋण (Debt-to-GDP Ratio) को केंद्र सरकार के लिए 40 प्रतिशत तथा संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों के लिए 60 प्रतिशत तक सीमित करे। 3. 'राजस्व घाटा' (Revenue Deficit) उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ सरकार का कुल राजस्व व्यय कुल राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है, और यदि सरकार द्वारा राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए उधार (Borrowing) का उपयोग किया जाता है, तो इसे अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक और पूंजी-सृजक राजकोषीय उपाय माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश की प्रकृति क्या है? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित वित्तपोषण' (Green Finance) और 'भारतीय रिजर्व बैंक' (RBI) द्वारा जारी संप्रभु हरित बॉंड (Sovereign Green Bonds - SGrBs) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले संप्रभु हरित बॉंड (SGrBs) का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था में कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity) को कम करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है, तथा इसके तहत प्राप्त आय का उपयोग जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा उत्पादन या बड़े पैमाने पर जलविद्युत परियोजनाओं (25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली) के वित्तपोषण के लिए भी किया जा सकता है। 2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा इन बॉंडों की नीलामी 'एकीकृत मूल्य नीलामी पद्धति' (Uniform Price Auction Method) के माध्यम से की जाती है, और ये बॉंड सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) के प्रयोजनों के लिए पात्र प्रतिभूतियाँ (Eligible Securities) माने जाते हैं। 3. संप्रभु हरित बॉंडों के फ्रेमवर्क के तहत पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करने तथा बॉंड से प्राप्त आय के पारदर्शी आवंटन की निगरानी के लिए वित्त मंत्रालय के अंतर्गत गठित 'हरित वित्तपोषण कार्य समिति' (Green Finance Working Committee) सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित债券' (Green Bonds) और भारत में सतत वित्तपोषण (Sustainable Finance) की पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हरित बॉन्ड एक प्रकार का निश्चित आय वाला साधन है जिसका उपयोग विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ परियोजनाओं, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ परिवहन के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। 2. भारत सरकार के केंद्रीय बजट 2022-23 की घोषणा के अनुसरण में, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने देश में हरित अवसंरचना के लिए संसाधन जुटाने हेतु 'संप्रभु हरित बॉन्ड' (Sovereign Green Bonds - SGrBs) के फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है, जिसके तहत जारी किए जाने वाले इन बॉन्डों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्रबंधित किया जाता है। 3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरित बॉन्डों के लिए बाजार की अखंडता और पारदर्शिता बनाए रखने हेतु 'ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स' (Green Bond Principles) को अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA) द्वारा जारी किया जाता है, जो निवेशकों को यह सुनिश्चित करने में सहायता करते हैं कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग वास्तव में हरित परियोजनाओं के लिए ही किया जा रहा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → सती प्रथा का अंत किस गवर्नर जनरल के कार्यकाल में हुआ था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.