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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - Articles 36-51) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान निर्माताओं ने DPSP के विचार को आयरलैंड के संविधान से ग्रहण किया था, जिसने इसे स्पेन के संविधान से लिया था, तथा इन तत्वों को देश के शासन में मौलिक (Fundamental) माना गया है, जिसका अर्थ है कि देश के लिए कानून बनाते समय राज्य का यह कर्तव्य होगा कि वह इन सिद्धांतों को लागू करे।
  2. 2. हालांकि DPSP को न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) नहीं बनाया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त 'जीवन के अधिकार' के दायरे को विस्तृत करने के लिए राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को मौलिक अधिकारों के पूरक के रूप में पढ़ा जाना चाहिए और राज्य उन पर पूरी तरह उपेक्षा का रुख नहीं अपना सकता।
  3. 3. मूल संविधान में DPSP को चार स्पष्ट श्रेणियों या विचारधाराओं में विभाजित किया गया था, जिनमें समाजवादी (Socialist), गांधीवादी (Gandhian), उदार-बौद्धिक (Liberal-Intellectual) और न्यायिक (Judicial) सिद्धांत शामिल थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) को आयरलैंड के संविधान से लिया गया था (जिन्होंने इसे स्पेनिश संविधान से अपनाया था)। अनुच्छेद 37 के अनुसार ये तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा। कथन 2 सही है: यद्यपि DPSP प्रकृति से न्यायोचित (Non-justiciable) नहीं हैं यानी इन्हें अदालत द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता, फिर भी सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद', 'मिनर्वा मिल्स वाद' और अन्य मामलों में यह प्रतिपादित किया है कि मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच एक संवादात्मक संतुलन होना चाहिए तथा अनुच्छेद 21 के दायरे को व्यापक बनाते समय DPSP के उद्देश्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। कथन 3 गलत है: मूल संविधान में DPSP को किसी औपचारिक या सांविधिक श्रेणियों (जैसे समाजवादी, गांधीवादी, उदार-बौद्धिक) में विभाजित नहीं किया गया था; संविधान में इनका वर्गीकरण केवल वैचारिक व्याख्या और अध्ययन की सुगमता के लिए राजनीतिशास्त्रियों और न्यायविदों द्वारा किया गया है। इसके अलावा, 'न्यायिक' (Judicial) नाम की कोई श्रेणी DPSP के अंतर्गत शामिल नहीं है।
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