त्वरित लिंक्स
Civil services
1 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य विधायी और प्रशासनिक संबंध - Articles 245-263) के अंतर्गत विधायी संबंधों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को पूरे देश या उसके किसी हिस्से के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उसका 'अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रवर्तन' (Extra-territorial operation) होता है।
- 2. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर कानून बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्षों की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
- 3. अनुच्छेद 254 के अनुसार यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कोई कानून संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के उपबंध के विरुद्ध या असंगत है, तो संसद द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होगा, भले ही राज्य का कानून संसद के कानून के बाद बनाया गया हो या उसे राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो चुकी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 245 संसद को संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति देता है। इसके खंड (2) के अनुसार, संसद द्वारा बनाई गई कोई विधि इस आधार पर अमान्य नहीं होगी कि उसका अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रवर्तन (Extra-territorial operation) है यानी उसका प्रभाव भारत से बाहर भी है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 249 के तहत राज्य सभा द्वारा पारित संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, न कि दो वर्षों के लिए (हालांकि इसे आवश्यकतानुसार हर बार एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है)। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 254 के अनुसार, यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर राज्य का कानून संसद के कानून के विरुद्ध है, तो सामान्यतः संसद का कानून ही प्रभावी होता है। किंतु, यदि राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया ऐसा कानून राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखा गया था और उसे राष्ट्रपति की अनुमति (Assent) मिल चुकी है, तो वह राज्य में उस विषय पर प्रभावी रहेगा, भले ही वह केंद्रीय कानून के प्रतिकूल हो (बशर्ते संसद बाद में उसी विषय पर संशोधन करके नया कानून न बना ले)। अतः केवल कथन 1 सही है।
Related Questions
→
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक किसे माना जाता है?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के त्वरित निपटान के लिए की गई थी, और यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं और साक्ष्य नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
2. अधिकरण की पीठ (Bench) के समक्ष पर्यावरण से संबंधित किसी भी मामले या वाद को दायर करने के लिए वैधानिक समय-सीमा उस तिथि से छह महीने निर्धारित की गई है जिस दिन से पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाला कारण या विवाद पहली बार उत्पन्न हुआ था, हालांकि अधिकरण पर्याप्त कारणों से संतुष्ट होने पर इस अवधि को अधिकतम अतिरिक्त साठ दिन (कुल आठ महीने) तक बढ़ा सकता है।
3. NGT द्वारा पर्यावरण संबंधी मामलों में दिए गए आदेशों, निर्णयों या पुरस्कारों के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में ही दाखिल की जा सकती है, और अधिकरण के निर्णयों को उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) के अधीन चुनौती नहीं दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) के प्रावधानों और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) एक विशेष न्यायिक निकाय है जिसे पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के त्वरित निपटान के लिए स्थापित किया गया है, और यह अधिकरण भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के कड़े नियमों से बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
2. NGT अधिनियम के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि अधिकरण के समक्ष पर्यावरण प्रदूषण या क्षति से जुड़े किसी भी विवाद या आवेदन को उस कारण के उत्पन्न होने की तारीख से 'छह महीने' की अवधि के भीतर दायर किया जाना चाहिए, और अधिकरण के पास इस प्रारंभिक समयावधि को अधिकतम 'साठ दिनों' (60 days) तक की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाने की सीमित विवेकाधीन शक्ति प्राप्त है।
3. 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986' के अंतर्गत आने वाले सभी कानूनों को NGT के क्षेत्राधिकार की पहली अनुसूची (Schedule I) में शामिल किया गया है, किंतु 'भारतीय वन अधिनियम, 1927' (Indian Forest Act, 1927) और 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' को इसके वैधानिक क्षेत्राधिकार से पूर्णतः बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किस अनुच्छेद के तहत किया जाता है?
→
प्रमुख याम्योत्तर (0° देशांतर) और 180° याम्योत्तर मिलकर पृथ्वी को किन भागों में विभाजित करते हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.