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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'वित्तीय संबंधों' (Financial Relations - Articles 268-293) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 268 के तहत कुछ ऐसे शुल्क (जैसे औषधीय और प्रसाधन तैयारियों पर उत्पाद शुल्क) हैं, जिन्हें संघ द्वारा लगाया और कलेक्ट किया जाता है, किंतु उनका संग्रहण उस राज्य के भीतर से होने के कारण उस राजस्व का पूर्ण हिस्सा उस संबंधित राज्य को ही सौंप दिया जाता है।
- 2. अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ द्वारा लगाए और संगृहीत किए जाने वाले सभी कर और शुल्क (कुछ विशिष्ट उपकरों, सरचार्ज आदि को छोड़कर) केंद्र और राज्यों के बीच 'वित्त आयोग' (Finance Commission) की सिफारिशों के आधार पर वितरित किए जाते हैं, और इस प्रकार प्राप्त होने वाला राजस्व भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का हिस्सा नहीं बनता है।
- 3. अनुच्छेद 275 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ से उन राज्यों को वित्तीय सहायता (Grants-in-aid) दे, जिन्हें संसद की दृष्टि में वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, तथा असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के कल्याण के लिए इस अनुच्छेद के अंतर्गत अनिवार्य रूप से विशेष अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 268 के अनुसार, संघ सूची में उल्लिखित कुछ शुल्क (जैसे औषधीय और प्रसाधन तैयारियों पर उत्पाद शुल्क) केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाते हैं, लेकिन उनका संग्रहण उस राज्य के भीतर किया जाता है जहाँ वे लगाए जाते हैं, और उससे प्राप्त होने वाला पूरा राजस्व केंद्र को न जाकर उस संबंधित राज्य को ही प्राप्त होता है।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 270 के अंतर्गत केंद्र द्वारा लगाए और संगृहीत किए जाने वाले कर और शुल्क (कुछ विशिष्ट उपकर/सर्चार्ज और विशेष अधिनियमों के करों को छोड़कर) केंद्र और राज्यों के बीच बांटे जाते हैं। किंतु यह कर राजस्व पहले 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) में जमा होता है, और उसके बाद वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इसका हिस्सा राज्यों के बीच वितरित किया जाता है। अतः यह कहना गलत है कि यह संचित निधि का हिस्सा नहीं बनता।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 275 के तहत संसद को कुछ राज्यों को उनकी वित्तीय आवश्यकता के आधार पर 'सहायता अनुदान' (Grants-in-aid) देने की शक्ति प्राप्त है। इसके अलावा, इस अनुच्छेद में विशेष रूप से यह प्रावधान है कि संघ द्वारा असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को उनके जनजातीय क्षेत्रों के कल्याण और प्रशासन के स्तर को उठाने के लिए आवश्यक वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाएगा।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) के अंतर्गत विधायी शक्तियों के वितरण तथा अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा किसी राज्य के विधानमंडल को उस राज्य के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति है, किंतु संसद द्वारा बनाई गई कोई भी विधि इस आधार पर अमान्य (Void) नहीं समझी जाएगी कि उसका बहिःक्षेत्रीय प्रवर्तन (Extraterritorial Operation) होता है।
2. संविधान की सातवीं अनुसूची में विधायी शक्तियों को तीन सूचियों (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) में विभाजित किया गया है, और 'अवशिष्ट शक्तियाँ' (वे विषय जो तीनों सूचियों में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं हैं) संविधान के अनुच्छेद 248 के तहत विशेष रूप से राज्यों के विधानमंडलों को प्रदान की गई हैं, जो अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई संविधान की पद्धति के अनुरूप है।
3. जब राज्यसभा अपने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद को राज्य सूची में प्रगणित किसी भी विषय पर विधि बनानी चाहिए, तब संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) के उद्घोषणा और उसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इस आशय का लिखित विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, और यह उद्घोषणा संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है।
2. राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवृत्त होने पर संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार स्वतः ही निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी अलग से आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है, तथा आपातकाल समाप्त होने के तुरंत बाद ये अधिकार पुनर्जीवित हो जाते हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को किसी न्यायालय में निलंबित कर सकता है, किंतु ऐसा आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक ही सीमित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, 'दीवान-ए-कोही' (Diwan-i-Kohi) विभाग की स्थापना, इसके उद्देश्यों तथा दिल्ली सल्तनत के किस सुल्तान से इसका संबंध है, के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस कृषि विभाग (Diwan-i-Kohi) की स्थापना तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब क्षेत्र में कृषि उत्पादन को बढ़ाने और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
2. इस योजना के तहत सरकार द्वारा सीधे किसानों को आर्थिक सहायता (तकावी ऋण या सौंदड़) प्रदान की जाती थी, ताकि वे बीज, बैल और कृषि उपकरण खरीद सकें।
3. हालांकि यह विभाग व्यापक प्रशासनिक योजना के तहत शुरू किया गया था, किंतु अत्यधिक भ्रष्टाचार, अधिकारियों की उदासीनता, खराब भूमि के चयन और दोआब क्षेत्र में पड़े भीषण अकाल के कारण यह योजना पूरी तरह असफल सिद्ध हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India - ECI) की संरचना, स्वतंत्रता और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. निर्वाचन आयोग एक स्थायी और अखिल भारतीय निकाय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, और संविधान ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की अहर्ताओं या योग्यताओं को विधिवत रूप से निर्धारित किया है।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग के पास संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति के साथ-साथ चुनावों में उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के चुनावी विवादों का न्यायिक रूप से अंतिम निर्णय लेने की अनन्य शक्ति भी निहित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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बुद्ध के जीवन की किस घटना को 'महाभिनिष्क्रमण' के रूप में जाना जाता है?
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