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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Global Multidimensional Poverty Index - MPI) और भारत में गरीबी आकलन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वैश्विक MPI को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, तथा यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर — इन तीन समान रूप से भारित आयामों के अंतर्गत कुल 10 संकेतकों का उपयोग करता है।
  2. 2. भारत में नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) का आधार वैश्विक MPI की कार्यप्रणाली पर आधारित है, परंतु इसमें राष्ट्रीय संदर्भ के अनुरूप दो अतिरिक्त संकेतक — 'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) और 'बैंक खाता' (Bank Account) — जोड़े गए हैं, जिससे कुल संकेतकों की संख्या 12 हो जाती है।
  3. 3. नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों में बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, तथा इस सुधार में सबसे बड़ा योगदान पोषण और स्कूली शिक्षा के संकेतकों में सुधार का रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में गरीबों की संख्या में सबसे अधिक कमी आई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) को वर्ष 2010 से UNDP और OPHI द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है। यह स्वास्थ्य (पोषण, बाल मृत्युदर), शिक्षा (स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति) और जीवन स्तर (खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति) के 3 आयामों और 10 संकेतकों पर आधारित है। कथन 2 गलत है: नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय MPI में वैश्विक MPI के 10 संकेतकों के साथ-साथ दो और संकेतक जोड़े गए हैं, जिससे कुल संकेतकों की संख्या 12 हो जाती है, लेकिन वे दो अतिरिक्त संकेतक 'मातृ स्वास्थ्य' और 'बैंक खाता' नहीं हैं, बल्कि वे 'मातृ स्वास्थ्य' के स्थान पर 'एंटीनेटल केयर (ANC)' और 'बैंक खाता' (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana के संदर्भ में) आदि हैं। सटीक रूप से, नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में 12 संकेतक शामिल हैं, जिनमें स्वास्थ्य और पोषण के तहत बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य (Maternal health), स्कूली शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता, आवास, बिजली, खाना पकाने का ईंधन, बैंक खाते आदि शामिल हैं। मुख्य त्रुटि यह है कि राष्ट्रीय MPI में कुल संकेतक 12 हैं, लेकिन कथन 2 में दिए गए अतिरिक्त संकेतकों के नाम और संरचनात्मक विवरण में तकनीकी विसंगति हो सकती है; हालाँकि, सबसे बड़ा कारण कथन 2 की आंशिक अशुद्धता है क्योंकि नीति आयोग के सूचकांक में कुल 12 संकेतक हैं, परंतु आधिकारिक रूप से भारत के राष्ट्रीय MPI में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के अंतर्गत 12 संकेतक (पोषण, बाल एवं किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते) शामिल हैं। (यहाँ कथन 2 को असत्य माना गया है क्योंकि वैश्विक MPI के 10 संकेतकों में भारत ने 'मातृ स्वास्थ्य' को जोड़कर 12 संकेतक किए हैं, परंतु प्रश्न के मानक के अनुसार कथन 2 में कुछ भ्रम है। यदि हम मानक पाठ देखें, तो भारत के राष्ट्रीय MPI में 12 संकेतक हैं)। आइए स्पष्ट करें: नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में 12 संकेतक हैं (वैश्विक 10 + 2 यानी 'मातृ स्वास्थ्य' और 'बैंक खाता' जोड़े गए हैं)। अतः कथन 2 सही है या गलत? नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में 12 संकेतक हैं: पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, पेयजल, स्वच्छता, आवास, बिजली, खाना पकाने का ईंधन, बैंक खाते और परिसंपत्तियाँ। हाँ, मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाते ही वे दो अतिरिक्त संकेतक हैं। अतः कथन 2 सही है। (शुद्धि: कथन 2 सही है). कथन 3 सही है: नीति आयोग की बहुआयामी गरीबी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2013-14 से 2022-23 के दौरान करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं, और इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जिसमें पोषण, स्कूली शिक्षा और स्वच्छता का बड़ा योगदान रहा है।
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