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Indian Polity
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नागरिकता अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?

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नागरिकता अधिनियम 1955 में पारित किया गया था।
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भारत में कितने राज्यों में विधान परिषद (द्विसदनीय व्यवस्था) वर्तमान में मौजूद है? भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकहित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यह परिषद् केवल राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की सुनवाई करने और उन पर अंतिम न्यायिक निर्णय देने के लिए एक वैधानिक न्यायाधिकरण के रूप में कार्य करती है। 2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिश के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया गया था, और इस परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा की जाती है, जबकि प्रधानमंत्री इसके स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। 3. अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर संपूर्ण देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के इतिहास, दर्शन और संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें प्रस्तावना के आरंभिक शब्द 'हम, भारत के लोग' संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र से प्रेरित होकर जोड़े गए थे। 2. प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया, और यह संशोधन तत्कालीन स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर किया गया था। 3. उच्चतम न्यायालय ने 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद' (1995) में स्पष्ट रूप से यह अभीिमत व्यक्त किया कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है, जिसका उपयोग विधियों की व्याख्या करते समय और अस्पष्ट प्रावधानों के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, किंतु महान्यायवादी के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपने पद पर रहते हुए किसी भी आपराधिक मामले या निजी प्रैक्टिस में भारत सरकार के विरुद्ध विधिक सलाह न दे और सरकार की अनुमति के बिना किसी कंपनी के निदेशक का पद ग्रहण न करे। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को भारत की संचित निधि और प्रत्येक राज्य व संघ राज्य क्षेत्र (जहाँ विधानसभा हो) की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है, और उसकी रिपोर्टों को संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के विधानमंडल के पटल पर रखवाया जाता है। 3. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है; और उसे संसद की समितियों का सदस्य भी बनाया जा सकता है, जहाँ उसे मतदान करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक मूल्यांकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 38 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि राज्य, ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना करेगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, और राज्य आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं तथा अवसरों की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा (जिसे 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा जोड़ा गया था)। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती मामले' (1973) और 'मिनर्वा मिल्स मामले' (1980) में यह प्रतिपादित किया कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, तथा संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) इन दोनों के बीच संतुलन और सामंजस्य पर टिकी हुई है। 3. अनुच्छेद 48A के अंतर्गत पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्द्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का निर्देश दिया गया है, जिसे मूल संविधान में ही शामिल कर लिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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