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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) और उससे संबंधित घटनाक्रमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित होने के ठीक अगले दिन, यानी 9 अगस्त 1942 की सुबह, 'ऑपरेशन जीरो आवर' (Operation Zero Hour) के तहत महात्मा गांधी और कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था।
  2. 2. इस आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंका गया और समानांतर सरकारों (Parallel Governments) की स्थापना की गई, जिसमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, तामलुक (मिदनापुर) में 'जातीय सरकार' के तहत और सतारा में 'प्रति सरकार' (Prati Sarkar) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकारों में शामिल थीं।
  3. 3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने कांग्रेस के इस आंदोलन का पूर्ण समर्थन किया था क्योंकि उस समय सोवियत संघ पर जर्मनी के आक्रमण के बाद कम्युनिस्टों ने इसे 'साम्राज्यवादी युद्ध' से बदलकर 'जनता के युद्ध' (People's War) के रूप में देखा था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तुरंत बाद, 9 अगस्त 1942 की सुबह ब्रिटिश सरकार द्वारा 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और अन्य प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कथन 2 सही है: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी। बलिया (उत्तर प्रदेश) में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में थोड़े समय के लिए सरकार बनी, तामलुक (पश्चिम बंगाल) में 'जातीय सरकार' स्थापित हुई, और सतारा (महाराष्ट्र) में नाना पाटिल के नेतृत्व में 'प्रति सरकार' स्थापित हुई जो सबसे लंबे समय तक (1945 तक) सक्रिय रही। कथन 3 गलत है: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था और इसमें भाग नहीं लिया था। जब जून 1941 में जर्मनी ने सोवियत संघ पर आक्रमण किया, तो कम्युनिस्टों ने अंग्रेजों के साथ सोवियत संघ के गठबंधन के कारण इस युद्ध को 'साम्राज्यवादी युद्ध' से बदलकर 'जनता का युद्ध' (People's War) घोषित कर दिया और ब्रिटिश युद्ध प्रयासों में सहयोग का समर्थन किया, जिसके चलते उन्होंने कांग्रेस के 1942 के आंदोलन से दूरी बनाई रखी।
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