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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) और भारत में इसके संभावित कार्यान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) की अवधारणा के मूल में यह मान्यता होती है कि देश के सभी नागरिकों को बिना किसी पूर्व शर्त के एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) के रूप में एक न्यूनतम आय की गारंटी दी जानी चाहिए, जिससे काम करने की उनकी इच्छा और उत्पादकता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
  2. 2. भारत के संदर्भ में, आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में UBI का समर्थन करते हुए यह सुझाव दिया गया था कि यदि इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाए तो लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी सभी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी अपवाद के तत्काल समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि UBI उनका एकमात्र और पूर्ण विकल्प है।
  3. 3. UBI के समर्थकों का तर्क है कि यह पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं की तुलना में प्रशासनिक अक्षमताओं और रिसाव (Leakages) को काफी हद तक कम करता है, क्योंकि यह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) वास्तुकला और जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी का उपयोग करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) एक सामाजिक कल्याण प्रस्ताव है जिसमें देश के सभी नागरिकों को बिना किसी शर्त के नियमित रूप से एक निश्चित राशि नकद के रूप में दी जाती है। यह गरीबी उन्मूलन और न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित करने का एक साधन माना जाता है। कथन 2 गलत है: भारत के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2016-17) में UBI पर एक पूरा अध्याय था, जिसमें इसे गरीबी उन्मूलन के विकल्प के रूप में चर्चा तो की गई थी, लेकिन इसमें यह स्पष्ट रूप से सिफारिश नहीं की गई थी कि MGNREGA जैसी योजनाओं को बिना सोचे-समझे तुरंत समाप्त कर दिया जाए। सर्वेक्षण ने सुझाव दिया था कि सबसे कमजोर वर्गों (जैसे महिलाओं, बुजुर्गों, और बच्चों) के लिए इसे लक्षित या चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है, और सभी मौजूदा योजनाओं को अचानक पूरी तरह से समाप्त करना राजनीतिक और सामाजिक रूप से व्यावहारिक नहीं होगा। कथन 3 सही है: UBI के समर्थकों का मुख्य तर्क यह है कि यह बिचौलियों को समाप्त करता है और पारदर्शी तरीके से सीधे लाभार्थियों के खातों में राशि पहुँचाता है, जिससे प्रशासनिक लागत, भ्रष्टाचार और रिसाव (Leakages) में भारी कमी आती है। इसमें JAM (Jan Dhan-Aadhaar-Mobile) ट्रिनिटी का उपयोग किया जाता है।
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