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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1929 के 'लाहौर अधिवेशन' (Lahore Session) और 'पूर्ण स्वराज' के प्रस्ताव से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दिसंबर 1929 में आयोजित कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी, और इसी अधिवेशन में ऐतिहासिक 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) का प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसके तहत ब्रिटिश साम्राज्य से डोमिनियन स्टेटस की मांग को औपचारिक रूप से त्याग दिया गया था।
  2. 2. इस अधिवेशन में लिए गए निर्णय के अनुसार, 26 जनवरी 1930 का दिन पूरे देश में 'प्रथम स्वाधीनता दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी, और इसी ऐतिहासिक महत्व को स्मरण रखने के लिए भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से लागू किया गया था।
  3. 3. लाहौर अधिवेशन के दौरान ही यह निर्णय लिया गया था कि कांग्रेस अब सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) के माध्यम से करों का भुगतान न करने सहित कर न अदायगी अभियान शुरू करेगी, और इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए महात्मा गांधी को पूर्ण प्राधिकार सौंपा गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि दिसंबर 1929 में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी (यह कथन सही है), किंतु कांग्रेस ने औपचारिक रूप से ब्रिटिश सरकार को नेहरू रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए जो एक वर्ष का अल्टीमेटम दिया था, वह 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को समाप्त हुआ था और इस अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित किया गया था। हालाँकि, कथन 2 और 3 सही हैं: इस अधिवेशन के बाद 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में प्रथम स्वाधीनता दिवस मनाया गया था, तथा इसी ऐतिहासिक तिथि के सम्मान में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया। इसके अतिरिक्त, लाहौर अधिवेशन में ही सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने और करों का भुगतान न करने का निर्णय लेते हुए इसकी बागडोर महात्मा गांधी को सौंपी गई थी।
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