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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) के अंतर्गत संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा और 'राजभाषा अधिनियम, 1963' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 120 के अनुसार, संसद में कार्य-निष्पादन की भाषा हिंदी या अंग्रेजी होगी, किंतु लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति ऐसे किसी सदस्य को सदन में अपनी मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकते हैं जो हिंदी या अंग्रेजी में अपनी पर्याप्त अभिव्यक्ति नहीं कर सकता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 343 में यह उपबंध किया गया था कि संविधान के प्रारंभ से 15 वर्ष की अवधि (अर्थात 26 जनवरी 1965 तक) के बाद संघ के सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग स्वतः समाप्त हो जाएगा, बशर्ते संसद विधि द्वारा इसके आगे भी अंग्रेजी के प्रयोग को अधिकृत न करे।
- 3. राजभाषा अधिनियम, 1963 के प्रावधानों के तहत यह सुनिश्चित किया गया कि 26 जनवरी 1965 के बाद भी संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए और संसद में कार्य-व्यवहार के लिए हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा का निरंतर प्रयोग अनिश्चितकाल तक किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 120 के खंड (1) के अनुसार, संसद में कार्य-संवहन हिंदी या अंग्रेजी में किया जाता है। परंतु, सभापति या अध्यक्ष (यथास्थिति) किसी सदस्य को, जो हिंदी या अंग्रेजी में अपनी पर्याप्त अभिव्यक्ति नहीं कर सकता है, अपनी मातृभाषा में सदन को संबोधित करने की अनुमति दे सकता है।
कथन 2 सही है: संविधान के अनुच्छेद 343(2) के अनुसार, संविधान के प्रारंभ से 15 वर्ष की अवधि (अर्थात 26 जनवरी 1965) तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहा, जिनके लिए उसके प्रारंभ से ठीक पहले उसका उपयोग हो रहा था। संसद को विधि द्वारा इस अवधि को बढ़ाने का अधिकार दिया गया था।
कथन 3 सही है: गैर-हिंदी भाषी राज्यों (विशेषकर दक्षिण भारत) के विरोध को शांत करने के लिए संसद द्वारा 'राजभाषा अधिनियम, 1963' (Official Languages Act, 1963) पारित किया गया। इस अधिनियम के माध्यम से 26 जनवरी 1965 के बाद भी संघ के शासकीय प्रयोजनों और संसद में कार्य-व्यवहार के लिए हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को अनिश्चितकाल के लिए वैध बना दिया गया। अतः तीनों कथन सही हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान भारांश वाले आयामों के अंतर्गत कुल दस संकेतकों का उपयोग करता है।
2. भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक का आधार तैयार करने और उसकी नियमित प्रगति की निगरानी करने के लिए 'नीति आयोग' (NITI Aayog) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, तथा राष्ट्रीय स्तर पर यह सूचकांक वैश्विक MPI के तीन आयामों को ही बनाए रखता है, किंतु इसमें संकेतकों की कुल संख्या दस से बढ़ाकर बारह कर दी गई है।
3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों पर आधारित नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2015-16 और 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, और उत्तर प्रदेश राज्य में इस अवधि के दौरान गरीबों की संख्या में सबसे अधिक संख्यात्मक (absolute) कमी दर्ज की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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हार्टोग समिति (1929) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की स्वायत्तता, शक्तियों और इसकी सेवा शर्तों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 (2) के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम का होना अनिवार्य है जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर 'उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश' को हटाया जाता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना किसी भी परिस्थिति में पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के पश्चात उनकी सेवा शर्तों में उनकी अनावर्ती (Disadvantageous) के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है, जिसका अर्थ यह है कि उनके कार्यकाल के दौरान उनके वेतन, भत्ते और अन्य लाभों में उनके प्रतिकूल संशोधन नहीं किया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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